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धरमेंद्र: लुक्स और एक्टिंग का नायाब पैकेज

dainikbhaskar.com | Aug 01, 2012, 00:53 AM IST

60 से 80 के दशक तक अगर किसी ने सिल्वर स्क्रीन पर मर्दानगी को परिभाषित किया तो वे हैं धर्मेन्द्र। वे एक ऐसे एक्टर हुए, जो ऑन-स्क्रीन गुंडों को भी उतनी ही आसानी से सबक सिखाते थे, जितनी सहजता से खूबसूरत हीरोइनों के साथ रोमांस करते थे। तभी उन्हें एक साथ 'ही-मैन' और 'गरम-धरम', दोनों नामों से पुकारा गया। अपनी सजीव अदाकारी से उन्होंने करोड़ों दिलों पर राज किया है।
फिल्मों में शुरुआत
धरम को जैसे बॉलीवुड में आने की धुन थी। 'फिल्मफेयर न्यू टैलेंट अवार्ड' जीतने के बाद वे पंजाब से मुंबई आ गए। एक ऑडिशन में देखने के बाद एक डायरेक्टर ने उनसे कहा कि वे फिल्मों की जगह खेल में अपनी किस्मत आजमाएं। पर उनकी हाथों की रेखाओं में तो कुछ और ही लिखा था। प्रोड्यूसर अर्जुन हिंगोरानी ने धरम पर भरोसा कर उन्हें 'दिल भी तेरा, हम भी तेरे' फिल्म में साइन कर लिया और इस तरह 1960 में उन्होंने अपना डेब्यू किया। क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म के लिए उन्हें केवल 51 रुपये मेहनताने के रूप में मिले थे?
इसके अलावा, उन्हें पास के रेस्त्रां में रोज के नाश्ते की फैसिलिटी भी मिली थी। उन्होंने कई ब्लैक एंड व्हॉइट फिल्मों में काम किया, पर उन्हें पहचान मिली 1966 में 'फूल और पत्थर' से।
सफलता के शिखर पर
1960 के अंत तक धरम एक बिजी स्टार बन गए थे। उन्होंने एक-एक कर कई फिल्मों में काम किया, जिनमें ज्यादातर मीना कुमारी के साथ थीं। कहा जाता है कि इनके बीच अफेयर भी था। उसी दौरान ऋषिकेश मुखर्जी ने उन्हें 'अनुपमा' के लिए साइन किया, जो उनके कॅरियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई।
एक्टर के रूप में सफलता पाने के बाद धरम ने 'सत्यकाम' नाम की एक भावनात्मक फिल्म भी प्रोड्यूस की। पर इस दौर में राजेश खन्ना दर्शकों की पहली पसंद बन कर उभरने लगे थे। तब धरम ने 1970 के दशक में 'मेरा गांव मेरा देश' और 'जीवन मृत्यु' जैसी फिल्में कर उन्हें कड़ी टक्कर दी। फिल्मी कॅरियर तो अच्छा चल ही रहा था, उनकी निजी जिंदगी भी रूमानी होने लगी। हेमा मालिनी से उनके अफेयर की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनने लगीं। ऑन-स्क्रीन तो यह जोड़ी पहले ही काफी पसंद की जा रही थी। 'शोले' में तो दोनों के रोमांस को बहुत सराहा गया।
1970 के अंत तक धरम फिल्मों में काफी कम नजर आने लगे। पर 'धरम वीर' जैसी हिट ने इनके जादू को बरकरार रखा। 1987 में 'हुकूमत' जैसी सुपरहिट देकर इन्होंने तो कमाल ही कर दिया।
राजनीति का सफर-
फिल्मों की ही तरह धरम राजनीति में भी काफी सफल रहे हैं। उन्होंने बीजेपी की ओर से चुनाव लड़ते हुए 2004 में बीकानेर की संसदीय सीट जीती। पर अपने एक बयान से यहां भी विवादों में आ गए। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें परमानेंट तानाशाह नियुक्त कर दिया जाना चाहिए।। इस बयान के लिए उनकी जमकर आलोचना हुई थी।
खुद चुनें अपने सुपरस्टार को
हमारे लिए तो धर्मेन्द्र एक बेहतरीन एक्टर और एंटरटेनर हैं, एक स्टार जिसने अपने दम पर इंडस्ट्री में मुकम्मल जगह बनाई है। भास्कर के दूसरे बॉलीवुड अवॉर्डस में हम भी ऐसे ही स्टार्स को सलाम कर रहे हैं, जिन्हें दर्शकों ने सुपरस्टार बनाया। ट्रूली डेमोक्रेटिक इस अवॉर्ड में दर्शक इस बार भी अपने फेवरेट स्टार को वोट देकर उनका मुकाम तय करेंगे। भास्कर बॉलीवुड अवार्डस भारत का पहला ऐसा अवार्ड है जहां कोई ज्यूरी नहीं, दर्शक तय करते हैं अपना सुपरस्टार और धर्मेन्द्र पर भास्कर के बॉलीवुड अवार्डस की पंचलाइन बिल्कुल फिट बैठती है, ‘आप हैं तो स्टार हैं।’ तो भास्कर बॉलीवुड अवॉर्डस के जरिए अपने पसंदीदा सुपरस्टार को चुनने के लिए लॉग इन कीजिएwww.dainikbhaskar.com

Web Title: dharmendra, more than just a handsome hunk
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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