19 अप्रैल 1968
अरशद वारसी एक भारतीय अभिनेता हैं। इन्होंने हिन्दी फिल्म 'तेरे मेरे सपने'(1996) से अपने करियर की शुरुआत की थी। लेकिन इनकी पहचान 'मुन्ना भाई एमबीबीएस'(2003) के 'सरकिट' के रोल से हुई। इसके बाद 'लगे रहो मुन्नाभाई'(2006) और 'इश्कियां' में बब्बन के रोल ने इनको और प्रसिद्धि दिलायी।
नाम-अरशद वारसी खान
जन्म तिथि : 19 अप्रैल 1968
राशि: मेष
बाल : काला
आंख: काला
जन्म स्थान: मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
धर्म: मुस्लिम
वैवाहिक स्थिति: विवाहित
भाषा ज्ञान: हिन्दी, अग्रेजी
पसंदीदा अभिनेता: अमिताभी बच्चन
पसंदीदा भोजन: हैदराबाजी बिरयानी, इटालियन पाश्ता और चिकन फ्राइड चावल
इन्हें पहली बार 1996 में अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल में 'तेरे मेरे सपने' में काम करने का मौका मिला। इसकी सफलता के बाद करीब 6 साल तक इन्होंने कई फिल्में की, लेकिन 2003 तक इनको बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास सफलता नहीं मिली। जब कॉमेडी फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस आयी तो सफलता इनका कदम चूमने लगी। फिल्म फेयर अवॉर्ड में सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के रुप में पुरस्कृत हुए। इसके साथ ही 'मैने प्यार क्यों किया'(2005), 'सलाम नमस्ते'(2005), 'गोलमाल', 'काबूल एक्सप्रेस', 'लगे रहो मुन्ना भाई एमबीबीएस', 'धमाल'(2007), 'गोलमाल रिटर्नस'(2008), 'इश्कियां'(2010), 'गोलमाल-3'(2010) इन फिल्मों में भी इनको काफी प्रशंसा मिली।अरशद वारसी मुंबई में जन्म लिये। महाराष्ट्र के नासिक जिले के बार्नेस स्कूल में इनकी पढ़ाई हुई। चौदह साल की उम्र में ही ये अनाथ हो गए। शुरू के दिनों में मुंबई में रहने के लिए इनको काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। अरशद वारसी ने 14 फरवरी 1999 को मारिया गोरेटी से विवाह की। इनके पूत्र का नाम जेके वारसी है, जिसका जन्म 10 अगस्त 2004 को हुआ। स्कूल के दिनों में वारसी राष्ट्रीय स्तर के जिमनास्ट थे।
1996 - तेरे मेरे सपने
1997 - बेताबी
1998 - मेरे दो अनमोल रत्न, हीरो हिन्दुस्तानी, होगी प्यार की जीत
2000 – घाट
2001 - मुझे मेरी बीवी से बचाओ, जीतेंगे हम
2002 - जानी दुश्मन
2003 - वैसा भी होता है भाग दो, मुन्ना भाई एमबीबीएस
2004 – हलचल
2005 - कुछ मीठा हो जाए, मैने प्यार क्यों किया, सेहर, सलाम नमस्ते, चाकलेट, वाह! लाइफ हो तो ऐसी
2006 – गोलमाल, लगे रहो मुन्नाभाई, काबूल एक्सप्रेस, एंथोनी कौन है
2007 – धमाल, दन दना दन गोल
2008 – संडे, क्रेजी-4, मि.व्हाइट मि.ब्लैक, गोलमाल रिटर्नस
2009 - किससे प्यार करूं, एक से बुरा दो, शार्टकट, जमानत
2010 – इश्कियां, हम तुम और घोस्ट, गोलमाल-3
2011 - मुन्नाभाई चले अमेरिका, डबल धमाल
2005 - गीफा सर्वश्रेष्ठ कमेडियन पुरस्कार-हलचल
2007 - फिल्म फेयर सर्वश्रेष्ठ कमेडियन-लगे रहो मुन्नाभाई
2007 - जी सिने अवॉर्ड कमेडियन-लगे रहो मुन्नाभाई
2011 - स्टार स्क्रीन अवॉर्ड, सर्वश्रेष्ठ सहअभिनेता-इश्कियां