क्राइम रेट में ग्वालियर नंबर दो पर

ग्वालियर. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने उस आशंका पर मुहर लगा दी है, जो हर शहरवासी के दिल में थी। ब्यूरो की वर्ष 2011 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक क्राइम रेट के मामले में ग्वालियर देश के 50 बड़े शहरों में दूसरे नंबर पर है। अपराधों के कारण ही शहर के विकास की रफ्तार रुकी हुई है। उद्योगपति यहां निवेश करने के लिए हिम्मत नहीं जुटा पाते।
प्रदेश सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी औद्योगिकीकरण का माहौल नहीं बन सका। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार 11.2 लाख की आबादी वाले ग्वालियर शहर में वर्ष 2011 में 7816 अपराध दर्ज किए गए हैं। अपराध का ग्राफ बढ़ने का मुख्य कारण बेरोजगारी है। शहर में जेसी मिल बंद होने के बाद तेजी से बेरोजगारी बढ़ी। जेसी मिल के कर्मचारी उपनगर ग्वालियर में रहते हैं। मिल बंद होने के बाद बेरोजगार कर्मचारियों के बेटे अपराध से जुड़ गए। मिल क्षेत्र से जुड़े रहे उपनगर ग्वालियर व हजीरा थाने अपराध के आंकड़ों में शहर में सबसे ऊपर हैं। इस क्षेत्र से खाली बैठे लोगों को राजनीतिक दलों के नेता अपने लिए इस्तेमाल करते हैं और उन्हें संरक्षण देते हैं। अपराधियों में कानून का डर नहीं ग्वालियर में अपराध बढ़ने के पीछे मुख्य कारण कानून व प्रशासन का अपराधियों में भय खत्म होना है। कुछ प्रमुख घटनाओं में बाहरी हस्तक्षेप के कारण पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की जाती है, जिससे अपराधी बच जाते हैं। बेरोजगारी व आर्थिक कारणों से भी अपराध बढ़ते हैं। कानून व प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करे तथा रोजगार के साधन बढ़ाए जाएं तो अपराध नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. अर्चना कुशवाह, समाजशास्त्री, केआरजी कॉलेज
आर्थिक विकास का अभाव
ग्वालियर में अपराध का ग्राफ बढ़ने का कारण क्वालिटी एजुकेशन व आर्थिक विकास का अभाव है। यहां पर एजुकेशन संस्थान बढ़े हैं, लेकिन उनमें क्वालिटी नहीं है। इस कारण युवा यहां रोजगार न मिल पाने पर बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। क्षेत्र का आर्थिक विकास न हो पाना भी बड़ा कारण है। औद्योगिक क्षेत्र तो बने लेकिन उद्योग बंद होते गए। रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकारी तौर पर प्रयास किए जाने चाहिए। एजुकेशन की क्वालिटी बढ़ा कर अपराध के बढ़ते ग्राफ को रोका जा सकता है। डॉ. एनकेएस चौहान, प्रोफेसर, विधि विभाग, एमएलबी कॉलेज
संसाधन बढ़ते रहना चाहिए
एनसीआरबी की क्राइम रिपोर्ट अभी देखी नहीं है। जहां तक ग्वालियर में अपराध के आंकड़ों का सवाल है, इस वर्ष ग्वालियर में चेन लूट व अन्य अपराध विगत वर्ष की अपेक्षा कम हुए हैं। पुलिस के संसाधन समय के साथ बढ़ते रहना चाहिए। यूसी षडंगी, पुलिस महानिरीक्षक, ग्वालियर
बल व संसाधनों का अभाव
जिले में लगभग 24 हजार की संख्या में पुलिस बल है, जबकि आबादी 20 लाख ३क् हजार तक पहुंच गई है। उपलब्ध बल में से भी लगभग 15 फीसदी जवानों को फील्ड के बजाय अफसर व नेता अपने घर व निजी कार्यो में इस्तेमाल करते हैं। पुलिस के पास वाहन, हथियार व अन्य संसाधनों का भी अभाव है। जिले में बल व संसाधन बढ़ाने के लिए पिछले दो साल में कई प्रस्ताव प्रदेश सरकार के पास भेजे जा चुके हैं, लेकिन हुआ कुछ नहीं।




