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25 साल बाद कैसी दिखेगी रांची, झलक दिखी प्रेजेंटेशन में

भास्कर न्यूज. | Sep 06, 2012, 10:38AM IST
25 साल बाद कैसी दिखेगी रांची,  झलक दिखी प्रेजेंटेशन में
रांची. 25 साल बाद राजधानी कैसी दिखेगी, बुधवार को मास्टर प्लान-2037 के प्रेजेंटेशन में इसकी झलक दिखी। स्टेक होल्डर्स ने होटल बीएनआर चाणक्य में फीडबैक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के प्रेजेंटेशन को देखा। ढेर सारे डाटा पर पांच घंटे मंथन करने के बाद स्टेक होल्डर्स ने मास्टर प्लान के खाका में संशोधन के सुझाव दिए।

कार्यक्रम में आर्किटेक्ट और बिल्डरों ने सीएनटी एक्ट और लैंड यूज को लेकर सवाल उठाए। लेकिन कहा कि जब तक सीएनटी एक्ट के तहत आने वाली आदिवासी जमीन चिह्नित नहीं होगी, तब तक लैंड यूज तय नहीं हो सकता। ऐसे में यह मास्टर प्लान बनाना संभव नहीं है। विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान शहर में बहुत अधिक बदलाव किए बिना और रांची की संस्कृति को बचाकर रखते हुए प्लान बनाया जाना व्यवहारिक है। मौके पर विभिन्न विभागों के आर्किटेक्ट, इंजीनियर और बीआईटी मेसरा के आर्किटेक्चर डिपार्टमेंट के प्रोफेसर समेत कई अन्य मौजूद थे।

एक्सपर्ट कमेंट्स: सीएनटी पर स्टैंड क्लीयर किए बिना नहीं बन सकता है प्लान

फीडबैक की योजना

1. रिंग रोड के बाहर एक किमी के एरिया में शहर बढ़ेगा। इसके अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने होंगे। कहां क्या बनेगा, इसके लिए एरिया चिह्नित किया गया है।

2. सीएनटी एक्ट के अनुसार एरिया चिह्नित करना संभव नहीं है। इसका डाटा नहीं लिया गया है। मास्टर प्लान में सीएनटी का कोई मतलब नहीं बनता।

3. सरकार की इच्छाशक्ति पर सीएनटी एक्ट का मामला निर्भर है। सरकार को सख्त निर्णय लेना होगा। सरकार चाहे तो जमीन अधिग्रहण कर डेवलपमेंट कर सकती है।

4. पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम नहीं होने से दोपहिया वाहनों पर लोगों की निर्भरता बढ़ रही है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम, बीआरटीएस डेवलप करना होगा।

5. निर्माणाधीन रिंग रोड वर्तमान शहर से काफी दूरी पर है। राजधानी की आबादी बढऩे पर रिंग रोड की उपयोगिता बढ़ेगी और शहर में भीड़ कम होगी।

6. नगर निगम और रिंग रोड के एरिया की प्लानिंग बनाई जा रही है, लेकिन ट्रांसपोर्ट नगर, इंड्रस्ट्रीज, बस स्टैंड बनाने का प्रावधान रिंग रोड से बाहर किया गया है।

7. मास्टर प्लान द्वारा परिभाषित कृषि योग्य जमीन, ओपन स्पेस, रेसीडेंशियल, कॉमर्शियल, एजुकेशनल, ट्रांसपोर्ट, मेडिकल एरिया के अनुसार प्लानिंग कर काम करना होगा।

8. प्रशासन ने जमीन का डाटा उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में यह चिह्नित करना मुश्किल है कि किस क्षेत्र में कितनी ट्राइबल जमीन है।

एक्सपर्ट के सुझाव

> सीएमपीडीआई के आर्किटेक्ट टीके मुखुटी ने कहा कि रिंग रोड के बाहर विकास जरूरी है। पर जो एरिया चिह्नित है, उसमें सीएनटी एक्ट से प्रभावित कितना एरिया है।

> सीएनटी के चलते विकास बाधित है। जिस एरिया को रेसीडेंशियल और कॉमर्शियल घोषित किया गया है, क्या मास्टर प्लान बनने के बाद उस एरिया में विकास संभव होगा।

> डीसी विनय चौबे ने कहा कि जमीन अधिग्रहण बड़ी चुनौती है। एक किलोमीटर एलिवेटेड रोड बनाने पर आठ करोड़ खर्च होंगे तो एक किलोमीटर जमीन अधिग्रहण पर 24 करोड़ का खर्च आएगा।

> आर्किटेक्ट अनूप कुमार ने कहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलप होने के बाद भी दो पहिया वाहनों पर निर्भरता रहेगी। जरूरी है कि बीआरटीएस सिस्टम लागू करें।

> सरकार को रिंग रोड के तीन किमी के एरिया में प्रशासनिक पावर रखना होगा। भविष्य के मद्देनजर शहर से दूर एक और रिंग रोड का विकल्प अभी से प्लान करें।

> डिप्टी सीईओ ने कहा कि आरआरडीए क्षेत्र के 237 गांवों को भी प्लान में शामिल करें। संबंधित विभाग से कोआर्डिनेट कर प्लानिंग करें, ताकि विकास कार्य हो सकें।

> आर्किटेक्ट कुमुद झा ने कहा कि टालमटोल की नीति नहीं चल सकती है। सीएनटी एक्ट को समाप्त किए बिना एरिया चिह्नित करने से डेवलपमेंट संबंधी काम नहीं किए जा सकते हैं।

> निगम सीईओ ने कहा कि जमीन का डाटा प्रशासन देगा। नगरीय डेवलपमेंट निदेशक ने कहा कि आबादी का डाटा क्षेत्रवार दे देंगे।
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