विज्ञापन
 
 
 
 
 

जब मशहूर गीतकार निदा फाज़ली ने किसी और की शायरी की नकल की

 
Source: dainikbhaskar.com   |   Last Updated 2:04 AM (09/02/2012)
 
 
 
 

बॉलीवुड में दूसरे के गीतों की नकल आम बात है। किसी शायर की लाईन चुराकर अपना बनाके लिख देने की यहां लंबी फेहरिस्त है। लेकिन, हम जिस घटना के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, वह नज़्मों के नकल का एक बड़ा मामला था।

 

 

 
उर्दू के मशहूर शायर मख़्दूम मोहिउद्दीन की 1944 में छपे गज़ल की किताब सुर्ख सवेरा में एक नज्म है- इंतजार। इस नज्म को 1997 में बनी फिल्म तमन्ना में गीत के रूप में उपयोग किया गया है। लेकिन इसके गीतकार का नाम लिखा गया- निदा फाज़ली। ये वही निदा फाज़ली हैं, जो उर्दू के प्रतिष्ठित शायर और बॉलीवुड के गीतकार हैं।

 

 

 
पूजा भट्ट और महेश भट्ट की इस फिल्म में मख्दूम की नज्म का उपयोग तो कर लिया गया लेकिन इस नज़्म को जरा सा हेर-फेर कर लिखने के बाद श्रेय ले उड़े- निदा फाज़ली। नीचे मख़्दूम मोहिउद्दीन की वो नज्म और निदा फाज़ली के द्वारा तथाकथित लिखा गया गीत, दोनों दिया गया है। अब, आप तय करें कि यह नकल है कि नहीं।

 
मख़्दूम की नज्म- इंतजार

रातभर दीद-ए-नमनाक में लहराते रहे

साँस की तरह से आप आते रहे जाते रहे ।

ख़ुश थे हम अपनी तमन्नाओं का ख़्वाब आएगा

अपना अरमान बर अफ़गंदा नक़ाब आएगा ।

नज़रें नीची किए शरमाए हुए आएगा

काकुले चेहरे पे बिखराए हुए आएगा ।

आ गई थी दिले मुज़तर में शकेबाई -सी

बज रही थी मेरे ग़मख़ाने में शहनाई-सी ।

पत्तियाँ खड़कीं तो समझा के लो आप आ ही गए

सजदे मसरूर के मसजूद को हम पा ही गए ।

शब के जागे हुए तारों को भी नींद आने लगी

आपके आने की एक आस थी अब जाने लगी ।

सुबह के सेज से उठते हुए ली अँगड़ाई

ओ सबा तू भी जो आई तो अकेली आई ।

मेरे महबूब मेरी नींद उड़ाने वाले

मेरे मसजूद मेरी रूह पे छाने वाले ।

आ भी जा ताके मेरे सजदों का अरमाँ निकले

आ भी जा, ताके तेरे क़दमों पे मेरी जाँ निकले ।

 

निदा फाज़ली का गीत-(फिल्म तमन्ना)

रात भर दीदाए नमनाक में लहराते रहे

सांस की तरह से आप आते रहे जाते रहे

शब के जागे हुए तारों को भी नींद आने लगी

आपके आने की इक आस थी अब जाने लगी

हम तो समझे थे तमन्नाओं का ख्वाब आएगा

नज़रें नीची किए शरमाए हुए आएगा

काकुलें चेहरे पे बिखराए हुए आएगा

पत्तियां खड़की तो हम समझे कि आप आ ही गए

सजदे मसजूद के माअबूद को हम पा ही गए

सुबह ने सेज से उठते हुए ली अंगड़ाई

अय सबा तू भी जो आई तो अकेली आई

मेरे महबूब मेरे होश उड़ाने वाले

मेरे मसजूद मेरे रूह पे छाने वाले

आ भी जा ताकि मेरे सजदों का अरमां निकले

आ भी जा ताकि तेरे कदमों पे मेरी जां निकले।

 

 
इस गीत का वीडियो देख लीजिए, आपको यकीन हो जाएगा।
यूट्यूब से लिया गया वीडियो साभार

 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
3 + 4

 
 
 
 
विज्ञापन
 
 
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

Amazing Body Paintings
Controversies that rocked B-town
Just Added

Epic Vogue shoot
करियर कॉलेज में फेयरवेल पार्टी के दौरान स्टूडेंट्स ने बिखेरे रंग
 
 
 
विज्ञापन
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment