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भारतीय वैज्ञानिक ने सुलझाया ब्लैक होल्स का रहस्य

dainikbhaskar.com | Sep 21, 2013, 15:55PM IST
भारतीय वैज्ञानिक ने  सुलझाया ब्लैक होल्स का रहस्य

बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्ट्रीटयूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) के साइंटिस्ट और उनकी छात्रा ने मिलकर ब्लैकहोल्स के रहस्यों को सुलझाने के लिए अल्बर्ट आइंस्टीन के गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का सफलता पूर्वक उपयोग किया है।
पूरी दुनिया ने ब्लैक होल्स पर उनकी खोज को मान्यता प्रदान की है। इसमें हावर्ड युनिवर्सिटी के प्रोफेसर भी शामिल हैं।


आईआईएससी के भौतिकी विभाग के एसोशिएट प्रोफेसर बानीब्रत मुखोपाध्याय और उनकी छात्रा इंद्राणी बनर्जी इस महत्वपूर्ण टॉपिक पर रिसर्च के लिए पिछले दो साल से काम कर रहे थे।
प्रो. बानीब्रत मुखोपाध्याय और इंद्राणी बनर्जी की शोध को इंटरनेशनल जर्नल फिजिक्स लेटर्स में प्रकाशित किया गया है।


ब्लैक होल्स हालांकि नग्न आंखों से नहीं देखे जा सकते है, लेकिन ये अपने आसपास की चीजों को गुरुवशक्ति के चलते निगल लेते हैं। अभी तक यह माना जा रहा था द्रव्यमान और घुमाव ब्लैक होल्स के कारक तय करते हैं और वे ब्लैक होल्स लंबे मार्ग में प्रभाव बनाते हैं, जैसा कि एक तारे की मृत्यु होने के बाद होता है।


नए अध्ययन में बानीब्रत ने ब्लैक होल्स पर अधिक प्रकाश डाला है। उन्होंने द्रव्यमान और घुमाव के सहसंबंध पर प्रकाश डाला है। उन्होंने सिद्ध किया है कि द्रव्यमान और घुमाव एक दूसरे से स्वतंत्र नहीं बल्कि एक-दूसरे पर निर्भर है। उन्होंने यह सिद्धांत भी स्थापित किया है कि तारे का द्रव्यमान का उपयोग घुमाव की गणना के लिए किया जा सकता है।


ब्लैकहोल्स : एक ब्लैह होल ऐसी खगोलीय वस्तु होती है, जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता है कि प्रकाश सहित कुछ भी इसके खिंचाव से नहीं बच सकता है, जिसमें वस्तुएं गिर तो सकती है परंतु बाहर कुछ भी नहीं आ सकता है। ये अपने ऊपर पडऩे वाले प्रकाश को भी अवशोषित कर लेता है। ब्लैक होल्स तब बनते हैं जब तारों से उनका न्यूक्लिर फ्यूल निकलता है या इनकी मौत हो जाती है।
 

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