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'दिल ढूंढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन' गुलज़ार ने नहीं, ग़ालिब ने लिखा है

 
Source: dainikbhaskar.com   |   Last Updated 2:47 AM (10/02/2012)
 
 
 
 

दिल ढूंढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन

बैठे रहें तस्सवुर-ए-जानां किए हुए

जब भी आप ये गीत सुनते होंगे, तो आप कह उठते होंगे कि वाह! गुलज़ार साब ने क्या गीत लिखा है। लेकिन ठहरिए, क्या आप जानते हैं कि ऊपर के ये दो लाईन गुलज़ार ने नहीं लिखे हैं, मिर्जा ग़ालिब ने लिखे हैं। गुलज़ार साब ने सिर्फ इसका अंतरा लिखा है। ये अलग बात है कि अंतरा भी उतना ही लाज़वाब है जितना कि मुखड़ा।

 
 
 
 
 
 
 
 
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