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एक फुटबॉल मैदान जितने बड़े हैं एलियन!

Agency | Jul 08, 2012, 00:11AM IST

एलियन को लेकर जारी एक ताजा शोध में ब्रिटेन की सैटेलाइट विशेषज्ञ और सरकार की सलाहकार डॉ. मैगी एडेरिन-पोपोक का दावा है कि एलियन जेलीफिश जैसे हो सकते हैं। उनका आकार भी फुटबॉल के मैदान जितना बड़ा हो सकता है। पोपोक यूरोपियन स्पेस कंपनी आस्ट्रियम में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं।


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पोपोक ने इस बात को साफ नकार दिया है कि एलियन छोटे-छोटे हरे रंग के, कुछ विचित्र से दिखने वाले व्यक्ति हो सकते हैं (जैसा हॉलीवुड की फिल्मों में दिखाया जाता है)। पोपोक के मुताबिक हम जिस तरह से एलियंस के बारे में सोचते हैं, वैसा वास्तव में है नहीं। एलियंस हमसे बहुत ज्यादा एडवांस्ड हो सकते हैं।


 

एलियंस का होगा सिलिकॉन आधारित जीवन...


 

इंसानों का जीवन कार्बन आधारित होता है, लेकिन पोपोक एलियंस का जीवन सिलिकॉन पर आधारित मानती हैं। आवर्त सारणी में सिलिकॉन, कार्बन के नीचे आता है। सिलिकॉन में कार्बन जैसी समानताएं हैं और वह यूनिवर्स में बहुतायत से पाया जाता है। हो सकता है उनका डीएनए हमारे जैसा हो लेकिन वह सिलिकॉन बेस्ड होगा।


 

शायद उनसे कभी सामना न हो...


 

पोपोक मानती हैं कि एलियंस हमसे इतनी दूर हैं कि शायद कभी उनसे सामना ही न हो। ताजा अध्ययनों की मानें तो गैलेक्सी में कम से कम चार एलियन सभ्यताएं हैं।

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1970 में अंतरिक्ष में वोयेजर-1 यान छोड़ा गया था। इसकी यात्रा अब भी जारी है। सूर्य के बाद हमारे सबसे पास का तारा प्राक्जिमा सेंटॉरी है जहां वोयेजर को पहुंचने में 76 हजार साल लगेंगे।

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कैसे होंगे जेलीफिशनुमा एलियंस


 

डॉ. पोकाक कहती हैं कि जेलीफिश जैसे दिखने वाले एलियंस के पेट के नीचे संतरे जैसा स्ट्रक्चर हो सकता है, जो सिलिकॉन से बना होगा। इस संतरे जैसे स्ट्रक्चर का इस्तेमाल एलियंस अपनी सुरक्षा के लिए करते होंगे। एलियंस के शरीर में प्याज के आकार की थैली हो सकती है जो उनके उछाल लेने में मददगार साबित होगी।


 

मीथेन के बादलों में रहते होंगे


 

अपने शोध के आधार पर पोपोक कहती हैं कि एलियंस का विकास किसी ऐसी जगह संभव है जो मीथेन के बादलों से ढंका हो। यह जगह शनि का चंद्रमा टाइटन हो सकती है। हो सकता है कि उनका भोजन रासायनिक तत्व हों और वे अपने जीवन के लिए त्वचा से प्रकाश ग्रहण करते हों।


 

कौन है पोपोक


 

1968 में लंदन में जन्मीं पोपोक नाइजीरियन मूल की ब्रिटिश स्पेस साइंटिस्ट हैं। आस्ट्रियम में वह ऑप्टिकल इंस्ट्रूमेंटेशन ग्रुप की वह प्रमुख शोधकर्ता हैं।

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