BOLLYWOOD

 
विज्ञापन
 
Home >> Entertainment >> Bollywood Gupshup >> Tamil Nadu Bans Screening Of 'Vishwaroopam' For 2 Weeks

कर्नाटक और हैदराबाद ने भी नहीं रिलीज की 'विश्‍वरूपम'

1 of 7 Photos
नई दिल्ली. कमल हासन की फिल्‍म 'विश्‍वरूपम' तमिलनाडु में तो बैन कर ही दी गई है, लेकिन इसे कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी रिलीज नहीं किया गया।
 
मद्रास हाइकोर्ट ने तमिलनाडु में फिल्म की रिलीज पर 28 जनवरी तक बैन लगा दिया है। कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह 26 जनवरी को दोनों पक्षों के साथ फिल्म देखने के बाद अपना फैसला देगा। गुरुवार को अदालतों से फिल्‍म जगत से जुड़ी हस्तियों के लिए कई खबरें आईं।  केबीसी में अमिताभ बच्चन द्वारा पूछे गए एक सवाल पर सवालिया निशान लगाते हुए झांसी के मुदसिर उल्ला खान की तरफ से दायर याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई की अगली तारीख 28 जनवरी तय की गई। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अमिताभ बच्चन द्वारा कौन बनेगा करोड़पति के जरिए कुरान का 'अपमान' कर मुसलमानों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाई गई थी।  उधर, बॉलीवुड के दबंग सलमान खान को बहुचर्चित चिंकारा शिकार मामले में आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली (विस्‍तार से आगे के स्‍लाइड में पढें)।
 
तमिलनाडु में कमल हासन ने फिल्म पर प्रतिबंध के बारे में कहा, 'फिल्म को सेंसर बोर्ड से अनुमति मिल गई है। फिल्म में कुछ भी गलत नहीं है। फिल्म 500 सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। सभी में वीकएंड तक के टिकट पहले से ही बुक थे। तमिलनाडु में कुछ संगठन फिल्म का विरोध कर रहे हैं। मैं विरोध का कारण नहीं समझ पा रहा हूं। सेंसर बोर्ड ने फिल्म का कोई सीन नहीं काटा सिवाए पेरेंटल एडवाइस देने के।' फेसबुक पर बयान जारी कर कमल हासन ने कहा, 'मैं अपनी फिल्म को मिले समर्थन से अभीभूत हूं लेकिन यह जानकर दुखी हूं कि मेरी फिल्म कैसे मेरे मुस्लिम भाइयों के खिलाफ हो सकती है। समुदाय के समर्थन में आए मेरे बयानों ने मुझे एक हमदर्द की पहचान दी है। मैंने हमेशा एक अभिनेता से आगे बढ़कर इंसानियत की आवाज को सुना है। मैं हारमनी इंडिया का सदस्य रहा हूं। यह संस्था देश में हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम करती है। मैं न सिर्फ समुदाय का अपमान करने के आरोपों से दुखी हूं बल्कि मेरी संवेदनाओं का भी अपमान हुआ है। कुछ छोटे संगठन राजनीतिक फायदे के लिए मेरा इस्तेमाल कर रहे हैं। किसी बड़े व्यक्ति का अपमान करके चर्चा में आना तरीका बन गया है। यह लगातार हो रहा है। कोई भी तटस्थ और राष्ट्रवादी मुसलमान मेरी फिल्म देखने के बाद खुद पर गर्व महसूस करेगा। यह फिल्म इसी उद्देश्य के लिए बनाई गई थी। अब मैं कानून और समझ पर समर्थन के लिए निर्भर हूं। इस तरह के कल्चरल टेररिज्म को अब रुकना होगा। मैं उन लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने इस मौके पर इंटरनेट पर मेरा समर्थन किया।' (JLF में प्रेमचंद पर लगा दलितों को सम्मान नहीं देने का आरोप )
 
वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश झा के मामले में यह स्पष्ट कहा था कि केंद्र सरकार के पास किसी भी फिल्म के प्रदर्शन के लिए सर्टिफिकेट देने का अधिकार है। जब एक बार केंद्र सरकार के सेंसर बोर्ड ने फिल्म को पास कर दिया था तब बैन लगाने से पहले तमिलनाडु सरकार को सोचना चाहिए था। बोर्ड की चैयरमैन लीला सिंपसन तमिलनाडु में ही हैं। फिल्म सेंसर बोर्ड के चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय से दैनिकभास्कर डॉट कॉम को बताया गया कि फिल्म को एक बार फिर रिव्यू किया जा रहा है। हालांकि बोर्ड भी मामले के कोर्ट में होने के कारण टिप्पणी से बच रहा है। 
 
करीब 20 मुस्लिम संगठनों ने कड़ा विरोध करते हुए इस प्रतिबंध की मांग की थी। उनका आरोप था कि इसमें मुस्लिम समुदाय का नकारात्मक तरीके से चित्रण किया गया है। इसके बाद राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों को प्रतिबंध की सूचना दे दी है। उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं। कमल हासन कह चुके हैं कि फिल्म में मुस्लिम समुदाय को नकारात्मक रूप में नहीं दिखाया गया है। लेकिन इस समुदाय का क्रोध शांत करने में विफल रहे। फिल्‍म पर बैन के फैसले को उन्‍होंने सांस्‍कृतिक आतंकवाद करार दिया है।
 
सेंसर बोर्ड के चेन्नई रीजनल ऑफिर श्री वी पाकरीसामी ने आज सैंसर बोर्ड की अध्यक्ष लीला सैंपसन के साथ यह फिल्म दोबारा देखी। हालांकि उन्होंने फिल्म के कंटेंट पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। दैनिकभास्कर डॉट कॉम से बातचीत में उन्होंने कहा, 'मामला अभी कोर्ट के अधीन है, हम कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। हमने फिल्म को अक्टूबर में पास किया था।'
 
फिल्म को 11 सदस्यीय मुस्लिम दल ने रिलीज से पहले देखा था। इस दल के सदस्य रहे सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया  स्टेट सेक्रेटरी अब्दुल सत्तार ने दैनिक भास्कर डॉट कॉम से बातचीत में कहा, '21 जनवरी को हमने फिल्म देखी थी। फिल्म में मुसलमानों को हिंसक दिखाया गया है। अमेरिकी का गला काटते हुए दिखाया गया है। उसे मारने के बाद कुरान की आयत पढ़ते हुए दिखाया गया है। हिंसा के बाद में और पहले कुरान पढ़ते हुए दिखाया गया है। फिल्म में बताया गया है कि कुरान ही आतंकवाद की जड़ है।'
 
मजलिस मसबरत कमेटी से जुड़े जफरुल इस्लाम कहते हैं कि प्रोटेस्ट के बाद सरकार ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाया है जिससे साफ है कि जरूर कुछ गलत है जो फिल्म में कहा गया है। सरकार ने सोच समझकर ही फिल्म को प्रतिबंधित करने का फैसला लिया होगा। हालांकि जफरुल इस्लाम ने यह फिल्म नहीं देखी हैं। वह कहते हैं कि जैसे की उन्हें बताया गया है और विरोध करने वालो ने ईमेल भेजा है उसके मुताबिक फिल्म में दिखाया गया है कि कुरान आतंकवाद सिखाता है। यदि फिल्म में ऐसा दिखाया गया है तो यह सरासर गलत है। 
 
एक इस्लामिक स्कॉलर की हैसियत से यह कह सकता हूं कि कुरान में ऐसी एक भी आयत नहीं है जो इस तरह की बात कहती है। ऐसे बहुत लोग हैं जो कुरान को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। यह अफसोस की बात है कि बीजेपी और आरएसएस ने कुरान और इस्लाम के खिलाफ जो प्रोपागेंडा चला रहा है उसे फिल्मों में भी दिखाया जाने लगा है। वह कहते हैं कि सभी मुसलमान नहीं है लेकिन सभी आतंकी मुसलमान ही है। यह तरीका एक बहुत बड़े एजेंडे का हिस्सा है। वह देश की सेक्यूलर व्यवस्था को खत्म करना चाहते हैं। यह अफसोस की बात है कि फिल्मों में भी ऐसी बाते दिखाई जाने लगी है। जिसने भी इस तरह की कहानी लिखी है वह इस माइंडसेट से ही प्रभावित है। जो लोग कहानी लिख रहे हैं या फिल्में बना रहे हैं वह पहले कुरान को पढ़ें और उसके बाद ही कोई बात लिखे या दिखाए। 
 
फिल्म का विरोध कर रहे एडवोकेट ए मोहम्मद युसुफ कहते हैं कि मुस्लिम डेलिगेशन ने फिल्म देखी जिसके बाद उन्होंने हमे बताया है कि फिल्म में दिखाया गया है कि कुरान आतंकवाद की जड़ है। इसी से मुसलमानों की भावनाएं आहत है। फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि मुसलमान हिंसक होते हैं और सभी आतंकवादियों को मुसलमान दिखाया गया है। फिल्म के चरित्र आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने से पहले और बाद में कुरान पढ़ते हुए दिखाए गए है। फिल्म में मुस्लिम बच्चों और बुजुर्गों को भी आतंकवादी दिखाया गया है। 
 
हालांकि विश्वरूपम ऐसी पहली फिल्म नहीं है जिस पर प्रतिबंध लगाया गया है। इससे पहले जोधा अकबर को राजस्थान में रिलीज नहीं किया गया था। 1996 में फिल्म कामसूत्र को सेक्स कंटेंट होने के कारण प्रतिबंधित कर दिया गया था। हालांकि फिल्म संशोधित होकर बाद में रिलीज की जा सकी थी। 1996 में ही फिल्म फायर पर भी रिलीज के दिन प्रतिबंध लगाया गया था। हिंदूवादी संगठनों ने फिल्म दिखा रहे सिनेमाघरों पर भी हमला किया था। हालांकि कुछ दिन बाद फिल्म थिएटरों में दिखाई जाने लगी थी। 
 
साल 2003 में सेंसर बोर्ड ने फिल्म पांच को सेक्स कंटेंट, हिंसा और कोई सामाजिक संदेश न होने के कारण प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बाद 2005 में फिल्म वॉटर पर प्रतिबंध लगाया गया था। इस फिल्म को ऑस्कर में भी प्रतिबंधित कर दिया गया थआ। फूलन देवी के जीवन पर बनी फिल्म 'बेंडिट क्वीन' को भी अश्लील कंटेट होने के कारण बैन किया गया था। 2012 में ही फिल्म द गर्ल विद ड्रैगन टैटू को रेप सीन और अश्लील कंटेट के कारण बैन किया गया था। 
 
आगे की स्‍लाइड में जानिए चिंकारा केस और 'विश्‍वरूपम' का पूरा घटनाक्रम। 

 

24 जनवरी 2013 की खास खबरें

साहित्‍य से ज्‍यादा विवादों के चलते बदनाम हुआ है जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल

जीत के बाद धोनी बोले- कहां गए गोरे, वे क्या सिर्फ नमक मिर्च ही लगाने आते हैं

गीतिका को दुबई ले जाकर शारीरिक शोषण करना चाहता था कांडा

मजिस्‍ट्रेट ने लड़की से कहा- कपड़े उतारो, विरोध करने पर दी धमकी! 

मोबाइल पर इंटरनेट के बाद अब बात करना भी हुआ महंगा

इनकम टैक्‍स बचाने के सात उपाय

 

आपकी राय

 

कमल हासन ने अपनी फिल्म पर लगे प्रतिबंध को कल्चरल टैररिज्म (सांस्कृतिक आतकंवाद) बताते हुए मद्रास हाईकोर्ट में अपील की है। लेकिन सवाल यह है कि अभिव्यक्ति की आजादी कहां तक है और क्या फिल्मों का विरोध जायज है और इस तरह के प्रतिबंध से असल नुकसान किसका होता है?


आपके विचार
 
 
कोड:
7 + 1

 
Ad Link
विज्ञापन
विज्ञापन
 
 
 
 
Sabse Bada Match Fixer Contest
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

जीवन मंत्र

क्रिकेट

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment