जब इन्होंने टिकट लेकर देखा अपनी ही फिल्म का प्रीमियर

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सालों से ‘जाने भी दो यारों’ को मोस्ट फनी मूवी माना जाता रहा है। अब इस
क्लासिक कॉमेडी फिल्म का सीक्वल बनाने की तैयारी हो रही है।
डायरेक्टर कुंदन शाह इसके सीक्वल में भी उन्हीं कलाकारों को लेंगे, जो पहली फिल्म में थे। फिलहाल 2 नवंबर को ‘जाने भी दो यारों’ का नया रीस्टोर वर्जन दोबारा रिलीज किया जा रहा है। हाल ही में इसका प्रीमियर शो किया गया। कुंदन ने बताया कि ‘जाने भी .’ को रीस्टोर नहीं किया गया है।
यह एक डिफिकल्ट प्रोसेस होती है। हमने इसके ओरिजिनल प्रिंट को डिजिटल फार्मेट में कनवर्ट किया है। कुंदन को उम्मीद है कि इस फिल्म का सीक्वल भी इसी की तरह बेहतरीन होगा।
इन दिनों इसकी स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है। दरअसल इस क्लासिक कॉमेडी फिल्म का सीक्वल बनाने का
आइडिया कुछ सालों पहले आया था।
कुंदन कहते हैं, प्रोड्यूसर फिरोज नडियाडवाला ने यह आइडिया दिया था। तब रवि वासवानी और नसीरुद्दीन शाह को सीक्वल की स्क्रिप्ट पसंद नहीं आ रही थी। तब मैने उनसे कहा कि अगर वे पुरानी
फिल्म को ध्यान में रख कर स्क्रिप्ट पर काम करेंगे तो कभी भी पार्ट २ नहीं बना सकेंगे।
हमारे पास तो कुछ क्रेजी करने का लाइसेंस है, फिर फेल होने से क्या डरना। मैंने सीक्वल की स्क्रिप्ट दोबारा लिखी, पर दुर्भाग्य से बीच में रवि वासवानी का निधन हो जाने से मामला वहीं ठप हो गया।
अब इस फिल्म के 35 साल के सफर के बाद आगे का पार्ट बनाया जा रहा है। मूल फिल्म में नसीर और रवि को अंत में जेल हो जाती है। अब सीक्वल में इन दोनों को ३५ साल बाद जेल से बाहर आते हुए दिखाया जाएगा।
यह तो तय है कि नसीर अपना रोल खुद ही करेंगे, लेकिन रवि वासवानी का रोल किससे कराया जाएगा यह अभी तय नहीं है।
टिकट लेकर देखा अपनी ही फिल्म का प्रीमियर.
पुरानी ‘जाने भी दो यारों’ की दोबारा रिलीज के प्रीमियर पर फिल्म के एक और एक्टर सतीश कौशिक भी मौजूद थे। उन्होनें इस फिल्म से जुड़े कुछ यादगार मोमेंट शेयर किए।
सतीश ने बताया कि, उस समय इस फिल्म में डायलॉग के लिए कुंदन ने मुझे 3000 रुपए दिए थे और एक्टिंग के लिए 2000 रुपए। मेरा कुल मेहनताना 5000 रुपए बना था। तब 10 रुपए रोज कन्वेंस पर खर्च हो जाते थे।
इसके प्रीमियर के लिए कुंदन ने हमें पास नहीं दिए थे, उल्टे हमसे टिकट के पैसे चार्ज किए थे। यह एकमात्र ऐसी फिल्म थी जिसके एक्टर्स खुद उसी फिल्म के प्रीमियर में अपनी जेब से फिल्म देख रहे थे।
फिल्म के बाद कोई पार्टी भी नहीं दी गई थी। हम सब पैदल ही वापस आए थे और एक ढाबे पर खाना खाया था। उस समय तो हमने सेलीब्रेट नहीं किया था, लेकिन आज इस फिल्म को सेलीब्रेट कर रहे हैं। हमें इस महान कॉमेडी फिल्म में काम करने पर आज भी गर्व होता है।






