इंडस्ट्री में लगभग सभी इस बात से वाकिफ हैं कि संजय दत्त उदारवादी दृष्टिकोण रखते हैं। वे दिमाग से नहीं बल्कि दिल से सोचते हैं। करीबी बताते हैं कि 'कुछ फिल्मों के प्रस्ताव उन्होंने चाहकर भी रिजेक्ट नहीं किए क्योंकि उन फिल्ममेकर्स से उनके संबंध अच्छे थे।
दोस्ती के लिए उन्होंने करियर को भी ताक पर रख दिया। अब उनके हितैषी इस कोशिश में लगे हैं कि वे दिल और दिमाग दोनों से सोचें और मुलाहिजे में आकर ऐसा कोई फैसला न लें जो उनके ही पक्ष में न हो। फिल्म 'अग्निपथ' में कांचा चीना का किरदार नायक पर भी भारी पड़ा। इसकी सफलता और लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें और भी कई निगेटिव किरदारों के प्रस्ताव आए हैं।
हालांकि संजय किरदार का दम देखकर ही निर्णय लेने के पक्ष में नजर आ रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि 'पिछले हफ्ते उन्होंने चार स्क्रिप्ट्स पढ़ीं और चारों में उन्हें विलेन के लिए ही एप्रोच किया गया। संजय को खलनायक बनने से ऐतराज नहीं है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि वे इसी इमेज को कैश कराना चाहते हैं। दोस्ती-यारी के प्रभाव में आकर निर्णय लेने के बजाए वे नपा-तुला सही फैसला लेना चाहते हैं।
संजय के एक एक्टर दोस्त का कहना है 'वे बहुत भोले हैं। दोस्तों को ना नहीं कह पाते। हालांकि अब अपने शुभचिंतको के कहने पर वे खुद में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं।' आने वाले दिनों में वे फिल्म 'जिला गाजियाबाद' और 'डिपार्टमेंट' में नजर आएंगे।