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'मैंने प्यार किया' से 'एक था टाइगर' तक सलमान कैसे बने बॉलीवुड के 'दबंग'!

Mark Manuel | Jul 08, 2012, 18:02PM IST

एक्टर सलमान खान की फिल्म 'एक था टाइगर' ईद पर रिलीज होने जा रही है और वह इसके प्रमोशन की तैयारी में जुटे हैं। इसके साथ वह आजकल 'दबंग 2' की शूटिंग में बिजी हैं। फैन्स उनकी फिल्मों का बेसब्री से इंतजार करते हैं। 1989 में बतौर हीरो 'मैंने प्यार किया' फिल्म से कॅरियर की शुरुआत करने वाले सलमान आज बॉलीवुड में 'मिस्टर भरोसेमंद' बन चुके हैं। वह हर रोल को संजीदगी से निभाते हैं और उसमें बिल्कुल नेचुरल दिखते हैं।
 
23 साल के अब तक के फिल्मी जीवन में सलमान के फिजिक में ही नहीं, व्यवहार में भी काफी बदलाव आ चुका है। उनकी फिल्मों के बारे में क्रिटिक्स भले कुछ भी लिखें, लोग सलमान को बहुत पसंद करते हैं और उनकी फिल्में सुपरहिट हो रही हैं।
 
सलमान के इस सक्सेस के पीछे उनका तजुर्बा है। वह मार्केट की नब्ज पहचानते हैं। वह जितने बेहतरीन एक्टर हैं उतने ही चालाक बिजनेस मैन भी। उनको मालूम है कि कब क्या बिकेगा। ईद के मौके पर रिलीज होने वाली उनकी अधिकांश फिल्में सुपरहिट रही हैं जिनमें 2009 में 'वांटेड', 2010 में 'दबंग' और 2011 में 'बॉडीगार्ड' जैसी फिल्में शामिल हैं। कुछ फिल्में जो अन्य मौके पर रिलीज हुईं, वह फ्लॉप हो गईं। 'लंदन ड्रीम्ज', 'मैं और मिसेज खन्ना' और 'वीर' ऐसी ही फिल्में थीं। लेकिन जून 2011 में बारिश के महीने में रिलीज हुई रोमांटिक कॉमेडी 'रेडी' ओपनिंग और वीकेंड पर 'दबंग' के बाद सलमान की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी।
 
23 साल के अनुभवों ने सलमान को खुद पर भरोसा करना सिखाया। उनका मानना है कि फिल्म में सक्सेस का कोई फिक्स फॉर्मूला नहीं है और बॉलीवुड के किसी कैंप का हिस्सा होना सफलता की गारंटी नहीं देता। 'युवराज' और 'गॉड तुस्सी ग्रेट हो' के सुपरफ्लॉप होने के बाद 2009 में 'वांटेड' सुपरहिट हुई। उसके बाद हर कोई सलमान के गुड बुक में शामिल होना चाहता है।
 
वह सेंटीमेंटल हैं लेकिन नॉनसेंस नहीं हैं। अपने खानदान के लोगों से रिश्ता से इतर सलमान की दिली दोस्ती बहुत कम लोगों से है। सलमान की आमिर से दोस्ती है और अजय के साथ भी उनका करीबी रिश्ता है। लेकिन शाहरुख के साथ झगड़े के बाद उन्होंने अकेले चलना सीखा।
 
जब वह फिल्म के प्रमोशन में जुटते हैं तो कुछ आशंकाएं उनके भी मन में होती हैं। क्रिटिक्स क्या रेटिंग देंगे, ऑडियंस क्या कहेंगी या बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का कैसा परफॉर्मेंस रहेगा। उनका कहना है कि जब फिल्में सफल होती हैं तो इसका श्रेय सबको मिलता है लेकिन जब फिल्म फ्लॉप होती हैं तो उसका ठीकरा हीरो के सर फोड़ा जाता है। लगातार फ्लॉप होती फिल्मों के बाद 2009 में 'वांटेड' की सफलता के बाद उन्होंने बॉलीवुड में इतिहास लिख दिया। 2010 में 'दबंग' से स्टारडम पाने के बाद सलमान बहुत चेंज हो चुके हैं।
 
फिल्में उनकी पर्सनॉल्टी की बदौलत चलती हैं, यह बात उनको बखूबी मालूम है। वह अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए खुद ही आगे आते हैं। उनका कहना है कि प्रमोशन करना अब एक्टर की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। पहले फिल्मों की पब्लिसिटी के लिए दूरदर्शन और आमीन सयानी होते थे; होर्डिंग और पोस्टर्स लगाए जाते थे। लेकिन अब मीडिय़ा का जाल बहुत फैल चुका है। हर आदमी बिजी है, इसलिए प्रोड्यूसर एक ही चीज जानता है कि जिस मीडिया का जितना इस्तेमाल पब्लिसिटी के लिए करना हो, करना चाहिए। 'एक था टाइगर' के रिलीज होने के ढ़ाई महीने पहले से वह इसकी तैयारी में लग गए हैं।
 
उनका फिजिक ऐसा नहीं था जैसा कि आज है। 1990 से 2000 के बीच सिर्फ संजय दत्त थे जो बॉलीवुड में माचो बॉडी के मालिक थे। अब सलमान 47 साल के हो चुके हैं और 1989 से एक्टिंग कर रहे हैं। स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, जिम और एक्शन सींस की बदौलत उनके फिजिक में बहुत सारे बदलाव आ चुके हैं। उनके समय में आमिर, शाहरुख, अजय और अक्षय अपने सिक्स पैक्स के साथ एक्शन करने लगे तो सलमान ने भी इससे पैदा हुए खतरे को भांपा और वह अपने एक्शन को और ज्यादा ऊंचाई पर ले गए। उन्होंने एक बार कहा था कि एक्शन को इमोशन्स के साथ की जाए तो वह बिल्कुल नेचुरल लगती है। लड़ाई सिर्फ शरीर से नहीं, दिल से लड़नी चाहिए। इस खोज के बाद उनमें बदलाव आए।
 
उन्होंने यह महसूस किया कि अगर वह कैरेक्टर की तरह चलेंगे और बोलेंगे तो लोगों को उनमें ज्यादा यकीन होगा। ऐसा क्यों होगा? सलमान इसका जवाब देते हुए कहते हैं, 'हम सबको हीरो चाहिए। ऐसा नहीं है कि मैं कैरेक्टर प्ले करता हूं। यह मेरे 23 साल का अनुभव है जो मुझे कॉन्फिडेंस देता है।' इसी कॉन्फिडेंस का जादू है कि स्क्रीन और रियल लाइफ के सलमान में उनके फैन्स ज्यादा फर्क नहीं करते।

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