किसी हीरो के लिए सबसे जरूरी जो तीन चीजें होती हैं, वे हैं गुड लुक्स, गेट्र बॉडी और डांसिंग स्किल। ये तीनों ही नवाजुद्दीन सिद्दीकी में नहीं हैं, लेकिन उनकी यही खासियत उन्हें बड़ा स्टार बनाती है। यह कहना है नवाज की फिल्म ‘देख इंडियन सर्कस’ के डायरेक्टर मंगेश हाडावाले का। उनके अनुसार आजकल बॉलीवुड में डायरेक्टर्स की एक नई जमात है, जो छोटे बजट की फिल्में बनाती है और इन फिल्मों के लिए नवाज सबसे उपयुक्त सितारे हैं। कभी पांच सौ रुपए के लिए छोटा-सा रोल करने वाले नवाज आज बॉलीवुड में कैरेक्टर एक्टर्स के लिए रोल मॉडल बन गए हैं।
नवाज के संघर्ष की कहानी बहुत लंबी है। लगभग डेढ़ दशक के लंबे संघर्ष में वे कई ऐसे भीड़भाड़ वाले दृश्यों का भी हिस्सा बने, जिसके लिए वे राजी नहीं थे, लेकिन मजबूरी के चलते उन्होंने यह किया। एक बार नवाज ने पेप्सी का ‘सचिन आला रे’ वाला विज्ञापन किया। उस विज्ञापन में वे धोबी बने थे, लेकिन उन्होंने अपना मुंह छिपा लिया, ताकि वे एक्स्ट्रा आर्टिस्ट की श्रेणी में न मान लिए जाएं। इस एड की शूट के लिए नवाज को महज 500 रुपए मिले थे।
नवाज कहते हैं कि उन्होंने अपनी शुरुआती फिल्मों में चोर या भिखारी के रोल किए हैं। लोग सोचते थे कि ये गरीब दिखता है, इसलिए इसे गरीब वाले रोल्स दे दो। गरीबों के रोल करते-करते नवाज आज उस पीढ़ी के दिलों पर राज करने लगे हैं, जिसे यथार्थ फिल्में पसंद आती हैं।
आइये जानते हैं नवाजुद्दीन सिद्दकी के संघर्ष की कहानी...(आगे की फोटो स्लाइड्स पर क्लिक करें)