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मूवी रिव्यू- ये खुला आसमान

dainikbhaskar.com | May 26, 2012, 18:42PM IST
Genre: ड्रामा
Director: गीतांजलि सिन्हा
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Plot: युवा की जिंदगी की उलझनों को जानने-समझने के लिए इस फिल्म को जरूर देखना चाहिए।

इस फिल्म की कहानी अविनाश (राज टंडन) की है। स्कूली शिक्षा में वह सफल नहीं हो पाता और उसका जीवन चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वह अकेला महसूस करता है और व्यस्त मां-बाप उसकी भावनाओं को नहीं समझ पाते। वह निराश होकर अपने दादा (रघुवीर यादव) के पास जाता है। इसके बाद, दादा उसको जिंदगी की चुनौतियों से लड़ना सिखाते हैं।

 


स्टोरी ट्रीटमेंट-एक युवा की कहानी में भावनाओं को पर्दे पर बहुत सूक्ष्मता और करीने से उतारा गया है। इसमें पतंग को प्रतीक बनाकर जीवन की कहानी कहने की सफल कोशिश है। इस हाई वोल्टेज इमोशनल ड्रामा में टीनेजर रोमांस भी है। लेकिन, कुछ बोर करने वाले पल भी हैं जो इतनी अपीलिंग स्टोरी की रोचकता में रूकावट बनते हैं।

 


स्टार कास्ट-हालांकि राज टंडन इस फिल्म के नायक हैं लेकिन असली जान तो रघुवीर यादव हैं जो उनके दादु बने हैं। दादु के कैरेक्टर में रघुवीर ने शानदार परफॉर्मेंस दिया है। दर्शकों पर वह अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब हैं।

 


राज टंडन अपने रोल में नेचुरल दिखे हैं और उनकी इन्नोसेंसी इस कैरेक्टर में झलकती है। अन्या आनंद, यशपाल शर्मा और मंजूषा गो़डसे ने भी ठीकठाक एक्टिंग की है।

 


डायरेक्शन-गीतांजलि सिन्हा ने एक सेंसिटिव सब्जेक्ट के साथ न्याय किया है। स्क्रिप्ट में निर्देशक भावनाओं को भरने में सफल रहे हैं। क्लाइमेक्स में यह फिल्म थोड़ी फिल्मी है लेकिन बाकी हिस्सा नेचुरल लगता है। गांव के लाइफस्टाइल को भी बेहतरीन ढंग से पेश किया गया है।

 

डायलॉग्स/सिनेमेटोग्राफी/म्यूजिक-फिल्म में मधुर संगीत है और वह कहानी में अपनी जगह फिट हैं। कुछ गानों में जिंदगी के बारे में पतंग के जरिए बताया गया है। 'तुम मिले' युवा-प्रेम पर रोमांटिक नंबर है। सिनेमेटोग्राफी और डॉयलॉग्स दोनों ही अच्छे हैं। दादा और पोते के बीच संवाद दिल को छूते हैं।

 


क्यूं देखें-युवा की जिंदगी की उलझनों को जानने-समझने के लिए इस फिल्म को जरूर देखना चाहिए। साथ ही, रघुवीर यादव के बेहतरीन अदाकारी और शानदार संवाद के लिए इसे देखा जा सकता है।

 
 
 
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