फिल्म रिव्यू:'लव शव ते चिकन खुराना'

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User Rating:
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Star Cast:कुणाल कपूर, हुमा कुरैशी
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Director:समीर शर्मा
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Producer:
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Music Director:
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Genre:कॉमेडी/ड्रामा
कहानी
एक बुजुर्गवार हैं खुराना। वे एक पॉपुलर ढाबा चलाया करते थे, जहां उनकी चिकन करी का बड़ा बोलबाला था। तब से अनेक साल गुजर गए हैं।
ढाबा लगभग बंद हो चुका है, क्योंकि किसी और को यह सीक्रेट डिश बनाने का तरीका नहीं आता और खुराना अब अपनी लगभग पूरी याददाश्त गंवा चुके हैं।
एक फ्लैशबैक दृश्य में वे याद करते हैं कि उन्होंने किस तरह सबसे पहले अनजाने में ही चिकन करी बना ली थी। वे अपनी पत्नी से बतिया रहे थे और गलती से एक खास चूरन चिकन करी में पड़ गया था।
इस दृश्य में हम खुराना को युवा और हैंडसम पाते हैं, और उन्हें इस तरह देखना इसलिए अजीब लगता है क्योंकि अभिनेता विनोद नागपाल ने ही बूढ़े खुराना की भी भूमिका निभाई है।
दूरदर्शन के जमाने में टीवी देखने वालों को याद होगा कि भारत के पहले टीवी सोप ऑपेरा हम लोग (1984) में नागपाल ने एक शराबी पिता की भूमिका निभाई थी, जिनका नाम था बसेसर राम।
मैं सोचता था कि ए के हंगल की तरह बसेसर राम भी बूढ़े ही जन्मे होंगे। हम उन्हें जवान देखने की कल्पना ही नहीं कर सकते थे।
खुराना घराने में एक और अद्भुत चरित्र है और वे हैं मामाजी, जो लगभग पागल हैं। हो सकता है आप इस व्यक्ति को शक्ल देखते ही पहचान लें। उनका नाम राजेश शर्मा है और वे आमतौर पर पुलिस वाले की भूमिका निभाते हैं, जैसे कि नो वन किल्ड जेसिका में।
वे आला दर्जे के अभिनेता हैं और पहली बार उन्हें किसी फिल्म में एक अच्छी भूमिका निभाने का मौका मिला है। उन्होंने इस फिल्म में कमाल का काम किया है।
इससे यह भी पता चलता है कि केवल सुपर सितारों को अहमियत देने वाले बॉलीवुड में जाने कितने ही ऐसे प्रतिभाशाली अभिनेता होंगे, जिनकी प्रतिभा के साथ पूरा न्याय नहीं हो पा रहा है।
निर्देशक समीर शर्मा की भी यह पहली फिल्म है और उनकी खुशकिस्मती थी कि उन्हें एक बहुत अच्छी पटकथा (लेखक सुमीत भटेजा) मिली। नतीजा यह है कि एक ऐसी फिल्म बनकर तैयार हुई है, जिसे आप बार-बार देखना चाहेंगे।
यह एक अजीबोगरीब परिवार की कहानी है और इस तरह की फिल्में अपने आपमें एक विधा हैं। दुनियाभर में इस विधा पर अनेक बेहतरीन फिल्में बनी हैं, जैसे लिटिल मिस सनशाइन, माय बिग फैट ग्रीक वेडिंग वगैरह। बस फर्क इतना ही है, यह फिल्म पंजाब के एक छोटे-से पिंड (गांव) की कहानी है। फिल्म का हर किरदार अनूठा है।
कुणाल कपूर ने ओमी की भूमिका निभाई है। कुणाल भी बॉलीवुड के उन कलाकारों में से हैं, जिन्हें कम आंका गया है। ओमी घर से भागकर लंदन चला गया है, जो कि पंजाब की समर कैपिटल है। वह जिन लोगों को पंजाब में छोड़ आया है, उनमें उसकी सबसे अच्छी दोस्त और बचपन का प्यार भी शामिल है।
यह भूमिका हुमा कुरैशी ने निभाई है। अब वह लड़की एक डॉक्टर बन चुकी है। लड़का फ्रॉड है। इन दोनों की लव-हेट रिलेशनशिप सिनेमा के परदे पर हाल-फिलहाल में देखी गई सबसे दिलचस्प प्रेम कहानियों में से एक है।
लेकिन जाहिर है कि ओमी प्यार करने के लिए नहीं बना है। उसे पैसों की जरूरत है और इसके लिए उसे वह खास रेसीपी चाहिए। उसकी ही तरह हम भी यह जानने को उत्सुक रहते हैं कि आखिर ऐसी कौन-सी रेसीपी है, जो चिकन को इतना लजीज बना देती है।
यह एक ऐसा रहस्य है, जो हर फूडीज की जुबान पर रखा रहता है। अलबत्ता मैं फूडीज में शामिल नहीं हूं, लेकिन फिर भी कुछ जायके ऐसे होते हैं, जिनकी किसी और से तुलना नहीं की जा सकती, जैसे दिल्ली के किसी कॉलेज कैफे का कटलेट, कलकत्ते की पार्क स्ट्रीट की किसी दुकान पर आधी रात को मिलने वाली पीली दाल और लुधियाना के ढाबे का हंडी चिकन। चिकन तो खैर सब जगह एक जैसा ही होता है, बस शोरबे से फर्क पड़ जाता है।
लेकिन कोई डिश इस वजह से भी लजीज लग सकती है कि उसे बहुत ऐहतियात से बनाया गया हो। यही बात फिल्मों पर भी लागू होती है। इसलिए हैरत नहीं होनी चाहिए अगर थिएटर से बाहर निकलते समय हम चिकन खुराना के भी दीवाने हो जाएं और इस फिल्म के भी।



