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मूवी रिव्यू: 'खिलाड़ी 786'

Mayank Shekhar | Dec 07, 2012, 17:25PM IST
Genre: एक्शन/कॉमेडी
Director: आशीष मोहन
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Plot: यह फिल्‍म शुरुआत से ही आपको चौंकाने की कोशिश करने लगती है। यदि दृश्‍यों में हमारी दिलचस्‍पी न हो तो ध्‍वनियां हमारे सिर को चकराने लगती हैं।

यह फिल्‍म शुरुआत से ही आपको चौंकाने की कोशिश करने लगती है। यदि दृश्‍यों में हमारी दिलचस्‍पी न हो तो ध्‍वनियां हमारे सिर को चकराने लगती हैं। ओ‍पनिंग क्रेडिट शुरू होने से भी पहले अक्षय कुमार हवा में उछलते हैं, एक जीप के बोनेट को इतनी जोर से लात मारते हैं कि वह दो टुकड़ों में बंट जाती है।


कुछ समय बाद वे अपना परिचय देते हैं और जब वे मुक्‍के बरसाना शुरू करते हैं तो जीप इस तरह घूमने लगती है, जैसे तूफान में लोग तिनकों की तरह उड़ जाते हैं।


पंजाबी मुंडे अक्षय, जिनका वास्‍तविक नाम राजीव भाटिया है, इस फिल्‍म में बहत्‍तर सिंह की भूमिका निभा रहे हैं। यह सलमान खान के चुलबुल पांडे की ही तरह एक चालाक और भ्रष्‍ट, लेकिन मजेदार पुलिस वाला है। उसे कुदरत की ओर से यह अनूठी ताकत मिली है कि वह रोशनी से भी तेज गति से लोगों पर लात-घूंसे बरसा सकता है।


इसका मतलब यह है कि हम धरती पर बिखरे जख्‍मी लोगों को तो देख सकते हैं, लेकिन यह नहीं देख सकते कि बहत्‍तर ने उनका यह हाल किस तरह किया है।


कई फिल्‍में ऐसी होती हैं, जो हमारी इंटेलीजेंस का अपमान करती हैं। लेकिन यह फिल्‍म तो हमारी बुद्धिमत्‍ता को पूरी तरह से नजरअंदाज ही कर देती है। इसके बावजूद हम बुरा नहीं मानते, क्‍योंकि यह इन मायनों में बच्‍चों की फिल्‍म है।  यह हमसे उन बच्‍चों की तरह व्‍यवहार करने की अपेक्षा रखती है, जिनके दिमाग अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुए और जो कुछ भी देखकर हंस सकते हैं और तालियां बजा सकते हैं। ख़ुदा गवाह है कि हम इस तरह की फिल्‍मों को बहुत पसंद करते हैं।


इस तरह की अनेक फिल्‍में ’100 करोड़ क्‍लब’ में अपनी नामजदगी दर्ज कराने में कामयाब रही हैं। इन फिल्‍मों द्वारा की गई कमाई के आंकड़े सुनकर हम हैरान रह जाते हैं।


लोग इन आंकड़ों के बारे में जान-सुनकर खुश होते हैं। यह अजीब बात है, क्‍योंकि इस तरह की फिल्‍में देखने में उन्‍होंने जो पैसा खर्च किया है, वह लौटकर उनकी जेब में आने वाला नहीं है।


यह पागलपन आमिर खान की 'गजनी' के साथ शुरू हुआ था। सलमान की 'वांटेड' के साथ यह दोगुना हो गया। आमिर तो 'गजनी' करके आगे बढ़ गए, लेकिन सलमान ने खुद को सिंगल स्‍क्रीन के सबसे बड़े सितारे के रूप में स्‍थापित कर लिया। इस विधा ने दो अन्‍य अधेड़ उम्र के सितारों अक्षय कुमार और अजय देवगन को भी नया जीवन दिया।


 


'खिलाड़ी 786' अपने बेतुकेपन में 'सिंघम' और 'सन ऑफ सरदार' और झगड़ालूपन में 'राउडी राठौर' को भी पीछे छोड़ देने की कोशिश करती है। मूलत: यह साउथ के सिनेमा की प्रेरणा है। हालांकि यह फिल्‍म किसी दक्षिण भारतीय फिल्‍म की रीमेक नहीं है। लेकिन चिंता किस बात की। जब सभी रीमेक फिल्‍में अच्‍छा प्रदर्शन कर रही हों तो रीमेक्‍स की रीमेकिंग में क्‍या हर्ज है।


भारतीय संस्‍कृति की बहुलता को देखते हुए प्रोड्यूसर किसी चतुर राजनेता की तरह अपनी फिल्‍म में ज्‍यादा से ज्‍यादा समुदायों को खुश करने की कोशिश करता है। फिल्‍म का मुख्‍य डॉन (मिथुन चक्रवर्ती) महाराष्‍ट्र से है और उसकी बेटी (असिन) भी मराठी बोलती है। लेकिन डॉन के गुर्गे यूपी-बिहार के लहजे में बात करते हैं। हीरो पंजाब दा पुत्‍तर है और निश्चित ही उसकी हथेली पर लिखी संख्‍या 786 को मुस्लिमों द्वारा पवित्र माना जाता है। और यदि फिल्‍म के सेकंड हीरो हिमेश हों तो गुजराती दर्शकों को अपनी ओर खींचने में भी दिक्‍कत नहीं होनी चाहिए।


वास्‍तव में यह हिमेश की ही फिल्‍म है और उन्‍हें चतुराई के साथ फिल्‍म के प्रचार से दूर रखा गया है। उन्‍होंने फिल्‍म का संगीत रचा है और वह लोकप्रिय साबित हो रहा है।


‘बलमा’ नामक एक गाने के फिल्‍मांकन के दौरान वे चालाकी के साथ आर.डी. बर्मन की तस्‍वीरों का इस्‍तेमाल करते हैं। यह दुखद है। भले ही महान आर.डी. का सेंस ऑफ ह्यूमर जबर्दस्‍त रहा हो, लेकिन उनकी आत्‍मा को इस सबमें नहीं घसीटा जाना चाहिए। हिमेश इस फिल्‍म के निर्माता भी हैं और उन्‍होंने इसकी कहानी और गीत भी लिखे हैं।


कहानी से याद आया कि फिल्‍मों में कहानियां भी होती हैं। हिमेश भाई इस फिल्‍म में एक वेडिंग ऑर्गेनाइजर के बेटे की भूमिका निभा रहे हैं। जोड़ियां मिलाने में नाकाम रहने पर उसे पिता द्वारा निकाल बाहर कर दिया जाता है। अपनी छवि सुधारने की खातिर वह एक नकली पुलिस वाले के साथ एक डॉन की बेटी का मामला फिट करवाने की कोशिश करता है।


फिल्‍म के डायलॉग सुनकर लगता है कि शायद संवाद लेखक को प्रति शब्‍द भुगतान किया गया होगा, इसलिए जब उसे चेक मिलने बंद हो गए होंगे तो उसने खुद को दोहराना शुरू कर दिया होगा। इस तरह की अनेक फिल्‍मों में हीरो का एक तकिया कलाम हुआ करता है, लेकिन इस फिल्‍म में तो हीरो के तकरीबन एक दर्जन तकिया कलाम हैं।


हम एक ही बात को बार-बार सुनते रहते हैं। आखिरकार, जब हम अक्षय को 786वीं बार भूतों का संसार, सच्‍चे वाला प्‍यार, बहत्‍तर पाजी की रफ्तार कहते सुनते हैं, तो हम समझ जाते हैं कि अब हम इसे और बर्दाश्‍त नहीं कर सकते। अब तो हमें बख्‍़श दीजिए, पाजी। प्‍लीज़।

 
 
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