'जिस्म-2': ना लव, ना सेक्स, सिर्फ धोखा!

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User Rating:
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Critic Rating:
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Star Cast:सनी लियोनी, रणदीप हुडा, अरुणोदय सिंह
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Director:पूजा भट्ट
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Producer:पूजा भट्ट, डीनो मोरिया
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Music Director:अरको प्रावो मुखर्जी
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Genre:इरॉटिक थ्रिलर
कहानी
हमें हीरो की कॉफी टेबल पर नोम चॉम्स्की की एक किताब और चे ग्वेरा की जीवनी नजर आती है। वह एक पांच सितारा रिसोर्ट में तन्हा जीवन बिता रहा है। रिसोर्ट शायद श्रीलंका में है। अपने इस खुफिया ठिकाने से वह भारत में बम धमाकों और हत्याओं की योजना बनाता है। कबीर (रणदीप हुडा, जिन्होंने इस फिल्म में भट्ट कैम्प के प्रिय इमरान हाशमी की जगह ले ली है)एक राजनीतिक हत्यारा है।
कुछ समय पहले तक वह एक पुलिस अधिकारी हुआ करता था। उसकी एक गर्लफ्रेंड (सनी लियोनी ) भी थी। एक दिन अचानक वह उसकी जिंदगी से बेदखल हो गया और ऐसा लगा मानो उसका कहीं कोई नामोनिशान बाकी नहीं रह गया हो। उसके साथ क्या हुआ था?यह जानने में उसकी गर्लफ्रेंड को भी कोई दिलचस्पी नहीं है। हमें तो यूं भी उसकी कोई परवाह नहीं होती।
मैं जिस थियेटर में बैठकर यह फिल्म देख रहा था, उसमें भारी तादाद में मौजूद पुरुष दर्शक निश्चित ही इस फिल्म को इसके सितारों, गानों या कहानी के लिए देखने नहीं आए थे। यहां तक कि टाइटिल और प्रोमो से भी ‘जिस्म 2’और ‘जन्नत 2’में अंतर करना कठिन लगता है। दर्शक शायद इस फिल्म की नायिका या प्रेम दृश्यों को देखने के लिए आए थे।
हमारे सिनेमा की अनेक अभिनेत्रियों का अस्तित्व केवल इसी बात पर आधारित है कि वे हमारे सपनों में कितनी सनसनी पैदा कर सकती हैं। यौन दमित भारत में यह एक किस्म की समाजसेवा है। बॉलीवुड में सनी लियोनी के पदार्पण की घोषणा ने अनेक पुरुषों के मन में आकर्षण जगाया होगा। इस मामले में इस फिल्म के निर्माता महेश भट्ट बड़े चतुर सुजान हैं। सनी लियोनी भारतीय फिल्मों में काम कर रहीं उनके जैसी ही अन्य नायिकाओं –भोजपुरी या बांग्ला फिल्मों की मोनालिसा, दक्षिण की नमिता या शकीला या मुंबई की राखी सावंत या शर्लिन चोपड़ा –से इन मायनों में अलग हैं कि उपरोक्त महिलाओं के उलट मिस लियोनी वास्तव में पश्चिम की एक पोर्न स्टार हैं।
किसी नियमित पोर्न दर्शक के लिए पोर्न मूवी उसी तरह है, जैसे लवमेकिंग के लिए बुद्धिहीन सेक्स होता है। यह पूरी तरह से पाशविक है : अपने प्रयोजनों में आडंबररहित और अपनी भौतिकता में कुछ-कुछ अवास्तविक।
इस फिल्म के निर्माताओं को मिस लियोनी के अभिनय को सुधारने के लिए केवल एक ही चीज अच्छे-से करनी थी और वह थी डबिंग। लेकिन फिल्म में डबिंग भी ठीक से नहीं की गई है। हर बातचीत में लियोन केवल बैठी या खड़ी रहती हैं, गहरी सांसें भरती और छोड़ती रहती हैं और घबराहट के साथ अपनी भौंहें तानती रहती हैं। कहना कठिन है कि वे इस फिल्म में आखिरकार कौन-सी भूमिका निभा रही हैं।
फिल्म में वह एक कॉलगर्ल भी हो सकती हैं। पहले दृश्य में लियोनी डिस्कोथेक से एक लड़के (अरुणोदय सिंह)को अपने साथ ले आती है। वह उसके साथ रात बिताने के ऐवज में उसे कुछ नहीं देता, लेकिन वह उसके सामने एक नौकरी की जरूर पेशकश रखता है। चंद ही मिनटों बाद वह भारतीय खुफिया एजेंसी के लिए अपने पूर्व बॉयफ्रेंड का शिकार करने को तैयार हो जाती है।लेकिन फिल्म में दो बलिष्ठ पुरुष भी हैं। दोनों ही एक अर्धनग्न लड़की के लिए शारीरिक रूप से ऑब्सेस्ड हैं। यह किसी पोर्नोग्राफिक फिल्म के लिए पर्याप्त अच्छी पटकथा है। जब तक आप क्लाइमैक्स पर पहुंचते हैं (मेरा आशय फिल्म के क्लाइमैक्स से है), तब तक आप समझ चुके होते हैं कि इस फिल्म में इस तरह की किसी भी अन्य फिल्म से अधिक सेक्स नहीं था और इसके लिए आपको दो गुर्राते हुए नग्न पुरुषों (अरुणोदय, रणदीप)और एक सनकी बॉस (आरिफ जकारिया)की अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर बकवास को बर्दाश्त करना पड़ता है।
आमतौर पर दर्शक असहज सेक्स दृश्यों पर खिलखिलाते हैं, लेकिन यहां वे नायकों के गंभीर संवादों पर खिलखिलाते हैं। शुद्ध उर्दू में बोले गए ये संवाद षड्यंत्रों की जटिल थ्योरियों के बारे में हैं। शायद इस फिल्म में हमारे लिए मनोरंजन के नाम पर बस इतना ही था। वर्ष 2002 में, सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में दिवंगत विजय आनंद ने सुझाया था कि वयस्क भारतीयों के लिए विशेष एक्स-रेटेड थियेटर्स होने चाहिए, जहां पोर्न फिल्में दिखाई जा सकें। इस सुझाव पर विचार-विमर्श करना तो दूर, आनंद को सेंसर बोर्ड से निकाल बाहर कर दिया गया था। काश, सरकार तब उनकी बात सुन लेती तो आज मिस लियोन को अभिनय करने की जेहमत नहीं उठाना पड़ती और हमें भी इन उबाऊ सनकी पुरुषों की बातें सुनने की यातना नहीं झेलनी पड़ती।




