MOVIE REVIEW: 'ABCD' प्रभु हैं देवा!

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Star Cast:प्रभु देवा, सलमान युसूफ खान,धर्मेश
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Director:रेमो डिसूज़ा
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Producer:
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Music Director:
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Genre:ड्रामा
कहानी
पता नहीं, हर कोई डांस कर सकता है या नहीं। मैं खुद कोई डांस का दीवाना नहीं हूं। मिसाल के तौर पर मैं बड़े मजे से यह फिल्म चुपचाप बैठकर देख सकता हूं, मानो स्क्रीन पर चल रही परफॉर्मेंस से मंत्रमुग्ध हूं। एक के बाद एक क्रेजी स्टेप्स हमारे सामने आते रहते हैं। और तब मैं आपसे कह सकता हूं कि हर कोई डांस कर पाए या नहीं, लेकिन हर कोई यह फिल्म जरूर मजे से देख सकता है।
बॉलीवुड की सबसे बदतर फिल्में वास्तव में म्यूजिक वीडियो का कलेक्शन भर होती हैं। फिल्म की कहानी से इन डांस सीक्वेंस का कोई नाता नहीं होता। यदि ऋतिक रोशन और शाहिद कपूर को छोड़ दें तो भारत के सर्वश्रेष्ठ माने जाने वाले अभिनेताओं के पैर मुश्किल से ही हिल पाते हैं। यह इसलिए अजीब लगता है, क्योंकि उनकी अनेक फिल्मों की बुनियाद साउंडट्रैक और कोरियोग्राफी में ही होती है। यह अजीब ही है कि आज तक किसी को यह ख्याल नहीं आया कि क्यों न एक पूरी फिल्म ही एक्चुअल हार्डकोर डांसर्स के साथ बनाई जाए। ऐसा करने पर इन फिल्मों की म्यूजिक और कोरियोग्राफी के लिए जो मेहनत की जाती है, वह भी उचित लगने लगेगी। खैर, यह फिल्म तो इसी तरह की है।
एबीसीडी में कुछ बेहतरीन डांसर एक साथ परदे पर नजर आते हैं। फिल्म का फंडा सीधा-सरल है : एक डांस नंबर के फौरन बाद दूसरा डांस नंबर। इससे होता यह है कि फिल्म के कलाकारों को अपनी पूरी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है। मद्रास के मूनवॉकर ग्रेट प्रभुदेवा और करियोग्राफर-निर्देशक रेमो की देख-रेख में इनमें से कोई भी युवा हमें निराश नहीं करता। उनके द्वारा की जाने वाली डांस स्टेप्स में से कुछ तो हमारे होश उड़ा देती हैं। इस फिल्म को इन बेहतरीन डांस स्टेप्स के लिए ही देखा जाना चाहिए।
कहानी यह है कि डांस इंस्ट्रक्टर प्रभुदेवा को एक पॉपुलर और महंगी डांस एकेडमी से निकाल बाहर कर दिया जाता है, क्योंकि शायद उसकी ऑनर से बनती नहीं है। विलेन जहांगीर की भूमिका के के मेनन ने निभाई है। उनका हुलिया देखकर हमें शाहरुख खान की फिल्म 'रॉ वन' के जी वन की याद आती है। जहांगीर टीवी के डांस शो से भी खूब कमाई कर सकता है और उसे प्रभुदेवा की कलात्मक प्रतिबद्धता की जरूरत नहीं है। वह प्रभुदेवा को उसके क्लासरूम में कहता भी है कि तुम 50 स्टूडेंट्स को नचाते हो, लेकिन असल जिंदगी में मैं पांच सौ लोगों को नचाता हूं।
लिहाजा, बदले की कहानी की बुनियाद तैयार हो जाती है। इन मायनों में यह एक और अंडर-डॉग कहानी है, लेकिन इसे कहीं वास्तविक रूप से फिल्माया गया है। शायद हमें यह फिल्म देखते समय अमरीश पुरी की याद आ जाएं। लेकिन कोई बात नहीं। प्रभुदेवा की क्लास में झुग्गी-झोपडि़यों के बच्चे डांस की तालीम हासिल करते हैं, जो कुदरती प्रतिभा से भरपूर हैं। फिल्म की कहानी तेज गति से आगे बढ़ती है। एक स्टूडेंट के पिता डांस के खिलाफ हैं। पुलिस वाले उस वेयरहाउस पर ताला जड़ देते हैं, जहां बच्चे प्रैक्टिस करते हैं। स्कूल में भी दो गुटों के बीच टकराव की नौबत बनती है। ये सभी इस कहानी के छोटे-छोटे हिस्से हैं, लेकिन फिल्मकार मूल कहानी से अपना ध्यान नहीं डिगाता। फिल्म देखते समय डांस के जानकार दर्शक बीच-बीच में ‘बॉडी वेव’, ‘मिरर वॉक’, ‘रोप स्लिंग’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर मेरी जानकारी में इजाफा करते रहते हैं। अनेक लोग इस तरह की फिल्में देखने इसलिए जाते हैं, ताकि डांस की नई स्टेप्स सीख सकें। चूंकि मैं डांस का विशेषज्ञ नहीं हूं, इसलिए मैं बता नहीं सकता कि इस फिल्म में दिखाई गई स्टेप्स नई हैं या नहीं। लेकिन म्यूजिक जरूर जानदार है। और यदि आप एक आम दर्शक की तरह यह फिल्म देख रहे हैं तो आप कह सकते हैं कि फिल्म में फाइट सीन और चेस सीक्वेंस को भी बहुत अच्छी तरह से ‘कोरियोग्राफ’ किया गया है।
हॉलीवुड की स्टेप अप सीरिज की तर्ज पर यह फिल्म पश्चिम की डांस शैलियों का अनुसरण करती है। आप चाहें तो मुंबई की झुग्गियों की तुलना ब्लैक अमेरिकन घेटोज से कर सकते हैं। फिल्म को प्रामाणिकता का पुट देने के लिए गणेश-विजर्सन का एक दृश्य रखा गया है। यही वह आयोजन है, जिसमें हर साल अनेक भारतीय युवा डांस की प्रैक्टिस करते हैं, सड़कों पर, खुले आसमान के तले। डांस का हुनर दिखाने के लिए दूसरा लोकप्रिय आयोजन है भारतीय शादियां। अभी तक हमारे नचैये मिथुन दा और गोविंदा से ही प्रेरित थे। भले ही आप डांस इंडिया डांस तक की यात्रा न तय कर पाएं, लेकिन इसके बावजूद यह फिल्म आपके लिए डांस की एक बेहतर टीचर साबित हो सकती है। यदि नहीं तो मेरी तरह आराम से बैठिए और शो का मजा लीजिए।




