प्राय: कामयाब लोग अपने संघर्ष के दिनों के साथियों से अलग हो जाते हैं तो क्या वे उन दिनों का स्मरण कराने वाली चीजों से भाग रहे हैं या ताजा खाते हुए बासे को भुला रहे हैं? यह भी संभव है कि अमृता विदेश चली गई हों। शहनाई के सुखद स्वरों का अभ्यस्त इलेक्ट्रॉनिक मीडिया शादी के जश्न की ओर दीवानों की तरह भाग रहा है। किसी के पास यह समझ नहीं कि अमृता या शाहिद से मिलें, जैसे अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर वे रेखा के जन्मदिन को अनदेखा कर गए।
चौकसे के मुताबिक शादियों में शिरकत करने वाले प्राय: जनाजों में शामिल नहीं होते और जिंदगी में भी दुख के समय आदमी तन्हा ही होता है। सुख के कपास को उठाने वाले बहुत आ जाते हैं, परंतु दुख के पहाड़ को तन्हा ही झेलना होता है।