धर्मनिरपेक्षता, समानता, स्वतंत्रता और भाईचारा ऐसे मानवीय मूल्य हैं, जिनके लिए अनेक महान लोगों ने ताउम्र संघर्ष किया है और उपनिवेशवाद तथा सामंतवाद इन मूल्यों के विरोधी रहे हैं, परंतु सबसे बड़ा संकट धर्म के नाम पर उसके कृत्रिम हव्वे द्वारा किया गया है। पाप और पुण्य की अवधारणा ने अन्याय किया है, मसलन अपंगता को पिछले जन्म के पाप के कारण होना बताया जाना गलत है। स्वर्ग या नर्क मनुष्य धरती पर ही रचता है।