Home » Features » Interviews » I Became Lyricist Luck By Chance: Niranjar Iyengar

लक से बन गया LYRICIST:निरंजन अयंगर

Kavita Rajput | Sep 24, 2012, 15:03PM IST
फिल्म 'माई नेम इज खान' के गाने 'सजदा' और 'नूर-ए-खुदा' जैसे जबरदस्त गानों के लिए आइफा अवार्ड जीत चुके निरंजन अयंगर ने मधुर भंडारकर की हालिया रिलीज़ फिल्म हीरोइन के गाने और स्क्रिप्ट लिखी हैं.

हाल ही में दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने अपने करियर के बारे में काफी चर्चा की.

आप फिल्म जर्नलिज्म से स्क्रिप्ट राइटर और गीतकार कैसे बन गए?
यह सब अचानक हो गया, मेरी यात्रा काफी लम्बी और इंटरेस्टिंग है. मैंने जी मैगज़ीन से बतौर रिपोर्टर अपने करियर की शुरूआत की. छह साल तक मैंने जर्नलिज्म किया. उसके बाद इस फील्ड को छोड़ मैंने एक कॉस्टयूम डिजायनर के तौर पर मनीष मल्होत्रा को ज्वाइन किया. उनके साथ मैंने तीन साल काम किया.

इसके बाद मैंने कभी ख़ुशी कभी गम की मेकिंग पर एक बुक लिखी और यहीं से लिखने का सिलसिला शुरू हो गया. मैंने जिस्म और कल हो न हो जैसी फिल्मों के डायलॉग्स लिखे.'माई नेम इज खान' के गानों के डमी लिरिक्स लिखकर शंकर महादेवन को सुनाए.उन्हें पसंद अ गए और इसी तरह मैं एक सॉन्ग राइटर भी बन गया.

मनीष मल्होत्रा के साथ अपने काम के अनुभव के बारे में बताएं?
मनीष मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त हैं. उनसे मेरे संबंध केवल प्रोफेशन तक ही सीमित नहीं हैं. उनके साथ काम करके ही मुझे पता चला की फिल्म इंडस्ट्री में काम कैसे होता है.उन्हें कमर्शियल सिनेमा की बहुत समझ है.

गीतकार बनना कितना मुश्किल है?
बतौर गीतकार तो अभी मेरा करियर शुरू ही हुआ है..अगर मैंने अच्छे गाने लिखना आगे भी जारी रखा तो कुछ सालों बाद में आपको बता पाऊंगा.मैं गुलज़ार साहब को अपना आदर्श मानता हूं.उनके लिखे गीत शंद्र होते हैं.मुझे अभी बहुत मेहनत करनी है फिर मैं खुद को गीतकार समझूंगा.
Click for comment
 
 
 
विज्ञापन
Email Print Comment