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देल्‍ही सफारी: बच्‍चे खुश, आप भी खुश!

Mayank Shekhar | Oct 20, 2012, 09:19AM IST
Genre: एनिमेशन
Director: निखिल आडवाणी
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Plot: मूवी रिव्यू:पढ़िए दैनिकभास्कर डॉटकॉम से जुड़े फिल्म क्रिटिक मयंक शेखर द्वारा लिखा रिव्यू।

यह दुखद किंतु सत्‍य है। गोविंदा, जो  अद्भुत रूप से ऊर्जावान परफ़ॉर्मर हैं और एक अभिनेता के रूप में भी जिन्‍हें कम ही आंका गया है, एक लंबे समय बाद एक ऐसी फिल्‍म में चमकदार प्रदर्शन करते हैं, जिसमें स्‍क्रीन पर उनका चेहरा नहीं दिखाया जाता। हम केवल उन्‍हें सुन सकते हैं।


इस फिल्‍म में उन्‍होंने एक बजरंगी नामक एक भोंदू बंदर के लिए वाइस-ओवर दिया है, ठीक वैसे ही, जैसे मणि रत्‍नम की फिल्‍म रावण में उन्‍होंने भगवान हनुमान से प्रेरित एक चरित्र निभाया था। बजरंगी शरारती है।


वह एलेक्‍स नामक तोते (इसके लिए अक्षय खन्‍ना ने वाइस-ओवर दिया है) को बर्दाश्‍त नहीं कर सकता। कोई बात नहीं। लेकिन एक छोटी-सी समस्‍या जरूर है। एलेक्‍स एक महत्‍वपूर्ण चरित्र है और सभी जीव-जंतुओं को उसकी जरूरत है।


इस एनिमल किंगडम में सभी मनुष्‍यों की भाषा में बात करते हैं (यह फिल्‍म हिंदी में है और इसका अंग्रेज़ी संस्‍करण भी बनाया गया है), लेकिन केवल तोता ही इकलौता ऐसा है, जो इस तरह बात कर सकता है, जिसे मनुष्‍य भी समझ सकें। वह एक घर में पालतू तोते की तरह रह चुका है।


वह जंगल के बजाय शहर की जिंदगी ज्‍यादा पसंद करता है और उसे पता है कि लोगों के साथ कैसे व्‍यवहार किया जाता है। इस तरह वह सभी प्राणियों के लिए एक आदर्श स्‍पोक्‍सपर्सन बन जाता है, जो मनुष्‍यों की दुनिया में उनकी बात रख सकता है।


वैसे तो यह एक पूरी तरह से बॉलीवुड फिल्‍म है, जिसमें शंकर एहसान लॉय का लुभावना बेस-हेवी साउंडट्रैक है और बॉलीवुड के अनेक रेफरेंस और जोक्‍स हैं, जिनकी टारगेट ऑडियंस मुख्‍यत: वयस्‍क हैं।


फिल्‍म में एक मुलायम भालू (जिसे बोमन ईरानी द्वारा अपनी आवाज दी गई है), हिरण, कबूतर, लकड़बग्‍घा, फ्लैमिंगो, चमगादड़, मधुमक्खियों के साथ ही एक तेंदुआ (सुनील शेट्टी) भी है, जिसे हाल ही में मनुष्‍यों द्वारा मार गिराया गया है। वह अपने पीछे एक पत्‍नी और एक बच्‍चे को छोड़ गया है।


जीव-जंतुओं की ये सभी प्रजातियां, भोजन श्रृंखला के विभिन्‍न स्‍तरों पर, सामान्‍य परिस्थितियों में भोजन के लिए एक-दूसरे का शिकार कर सकती हैं। लेकिन अपने घर की रक्षा करने के लिए वे सभी एकजुट हो जाते हैं।


खनन और औद्योगीकरण के चलते मनुष्‍य जंगल काट रहे हैं, लेकिन मनुष्‍यों की दुनिया में लोकतंत्र नाम की भी चीज़ है, जिसमें सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है।


अफसोस कि जानवरों की दुनिया में कोई लोकतंत्र नहीं है। वैसे भी लोभी मनुष्‍यों से बात करना आसान नहीं होगा। जैसा कि एक जानवर कहता ही है कि ‘वो आदमी हैं, आदमी पर भी रहम नहीं करते।’ ऐसे में वे दूसरी प्रजातियों के जंतुओं की समस्‍याएं क्‍या समझेंगे।


शायद मेनका गांधी उनकी मदद कर सकें! लेकिन वे निश्चित ही फिल्‍म में कहीं नजर नहीं आतीं, अलबत्‍ता फिल्‍म में दिखाए गए प्रधानमंत्री जरूर आई के गुजराल जैसे नजर आते हैं। जानवरों के पास अब कोई च्‍वॉइस नहीं रह गई है। नाच-गाने से भरी एक रोमांचक यात्रा के तहत वे पूरे  देश का चक्‍कर लगाते हुए नई दिल्‍ली की ओर बढ़ चलते हैं, ताकि संसद में बैठे देश के कानून निर्माताओं को थोड़ी बुद्धि दे सकें।
 


यह फिल्‍म 3डी में बनाई गई है और निश्चित ही तकनीक इस सिनेमाई अनुभव को और समृद्ध बना देती है। इस फिल्‍म का बजट चाहे जो हो, हॉलीवुड में बनाई जाने वाली इस तरह की फिल्‍मों जैसे मेडागास्‍कर फ्रेंचाइजी के सामने इसकी लागत कुछ नहीं होगी। लेकिन इसके बावजूद इस फिल्‍म की गुणवत्‍ता कहीं से भी कमतर नहीं लगती।


यह जरूर हो सकता है कि 70 एमएम तक खींचे जाने पर कुछ इमेजेस फटी-फटी नजर आएं, लेकिन लगता नहीं कि कोई और हिंदी फिल्‍म एनिमेशन के क्षेत्र में इस प्रकार की विश्‍व स्‍तरीय गुणवत्‍ता अर्जित करने के करीब आ पाई हो।


फिल्‍म की कहानी स्‍वीट और सिंपल है। स्‍क्रीन पर यह फिल्‍म बहुत सुंदर दिखाई देती है। साथ ही यह बच्‍चों के लिए एक अच्‍छी फिल्‍म भी है, जो उनका मनोरंजन करने के साथ ही उन्‍हें एजुकेट भी करना चाहती है।


आप बेधड़क इस फिल्‍म को अपने बच्‍चों को दिखाने ले जा सकते हैं। वे निश्चित ही इस फिल्‍म को एंजॉय करेंगे और आप भी बोर नहीं होंगे।

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