भोपाल. कुछ फिल्में बस अचानक बन जाती हैं और मील का पत्थर साबित हो जाती हैं। इन्हें बनाने वाले भी नहीं जानते कि वे क्या बनाने जा रहे हैं। जब फिल्म सामने आती है और दर्शक उसे बेहद पसंद करते हैं, तो उन्हें अहसास होता है कि उन्होंने कुछ ऐसा बना डाला है जो हिस्टॉरिक है।
फिर शायद वही राइटर, वही डायरेक्टर, वही एक्टर चाहकर भी वैसी फिल्म दोबारा नहीं बना सकते। वह अपनी तरह की एकमात्र क्लासिक बन जाती है। ऐसी ही एक क्लासिक फिल्म थी कुंदन शाह की 'जाने भी दो यारों' (1983)। (
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आगे तस्वीरों के जरिए जानिए इस फिल्म से जुड़ी कई रोचक बातें...