खाप पंचायत और
रूढि़वादी नेता महिलाओं की भूमिका को घरों तक सीमित करने के ‘हुक्म’ जारी कर रहे हैं। मुंबई के फिल्मी सितारों की पत्नियों के पास धन की कमी नहीं है। शाही ऐशोआराम के साधन उपलब्ध हैं, परंतु वे काम करती हैं। सामंतवादी परिवारों की पत्नियों की तरह गहना तुड़वाकर गहने बनवाने में समय नहीं बितातीं। उन्होंने अपना व्यवसाय खड़ा कर लिया है और कुछ ने उसके लिए प्रशिक्षण भी लिया है।
ऋतिक रोशन की पत्नी सुजैन और शाहरुख की पत्नी गौरी ने अपनी भागीदारी में डिजाइनर फर्नीचर और गृहसज्जा की कंपनी खोली है। बॉबी देओल की पत्नी तान्या अत्यंत धनाढ्य घराने से आई हैं, परंतु उनका अपना गृहसज्जा का ‘द गुड अर्थ’ नामक ब्रांड है। सुनील शेट्टी की पत्नी लंबे अरसे से इसी व्यवसाय में डटी हैं। असफल कलाकार संजय कपूर की पत्नी महीप ज्वैलरी डिजाइनर हैं और अपने काम में उन्हें महारत हासिल है।
अगर सितारा पत्नियों के जीवन में इतना धन और ऐशोआराम है तो उनके भय भी विचित्र हैं, क्योंकि सितारा पति स्टूडियो में अपनी नायिका से प्रेम दृश्य करके आया है तो प्रेम के उस आवेग का ‘तलछट’ भी अपने साथ लाया है। अपनी पत्नी के साथ अंतरंगता के क्षणों में कोई और नाम या छवियां भी कौंध जाती होंगी तो लाखों से सजा शयनकक्ष सांय-सांय करता होगा। प्रेम दृश्यों का अभ्यस्त नायक एक विभक्त हृदय लिए घर लौटता है। यह मनोदशा आम लोगों के जीवन में कम मात्रा में ही सही, लेकिन मौजूद रहती है। इस तथ्य को वात्स्यायन ने हजारों वर्ष पूर्व जान लिया था।
जहां एक ओर समृद्ध घरों में इस तरह की बात संभव है, वहां मध्यम वर्ग की महिला दिनभर दफ्तर में पुरुषों की नजरों में रहस्य की परतों को झेलते हुए लोकल ट्रेन में अनजान लोगों के चाहे-अनचाहे स्पर्श की अनुभूति लिए थकी-मांदी घर लौटती है, तो पति का स्पर्श कितने अनजान स्पर्श को पार करते हुए उसके अंतस तक कैसे पहुंचता होगा!
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