दुनिया भर की नज़रें भले ही नए साल की सुबह या पहले दिन पर टिकी रहती हैं, किंतु हिंदी फ़िल्मों की बहुत-सी हीरोइनों को गुज़र रहे साल की आख़िरी रात का इंतज़ार होता है।
जी हां, पुरुष-प्रधान इस फ़िल्म इंडस्ट्री में 31 दिसंबर ही वह दिन होता है, जब छोटी-मझोली हीरोइनें भी दिग्गज हीरो से बाजी मार जाती हैं। न्यू ईयर की शाम सबसे ज्यादा चांदी हीरोइनों की ही होती है।
नए साल का सवेरा दिखाने वाली जिस रात में अपने हुस्न और जलवे से हीरोइनें लाखों-करोड़ों कमा लेती हैं, उस रात ‘दबंग’ और ‘सिंघम’ से लेकर ‘बादशाह’ आदि तक की लोकप्रियता फीकी पड़ जाती है।
सो, किसी फाइव स्टार होटल में आयोजित पब्लिक परफॉर्मेस में अपने डांस सॉन्ग अथवा आइटम नंबर के जरिए तिजोरी भरने के लिए बेताब अभिनेत्रियां इस साल की भी विदाई रात्रि में सारे अभिनेताओं से आगे निकलती दिख रही हैं।
फ़िल्म प्रचारक के तौर पर बॉलीवुड में लंबा अनुभव हासिल कर चुकीं आरती सलगांवकर भी मानती हैं- ‘नववर्ष की पूर्व संध्या पर सबसे ज्यादा भाव हीरोइनों के बढ़ जाते हैं। ‘अलविदा-2012’ से भी इनकी जेब में करोड़ों की कमाई आने वाली है।
दरअसल, इस अवसर पर महज कुछ मिनटों की परफॉर्मेंस के बदले हीरोइनों को इतनी बड़ी रकम मिल जाती है कि कई बार शायद पूरी फ़िल्म के लिए भी नहीं मिलती है!
हर साल की तरह इस बार भी न्यू ईयर की नाइट में मुंबई स्थित ‘जेडब्ल्यू मैरियट’ और ‘सहारा स्टार’ जैसे पंचसितारा होटलों ने कई टॉप हीरोइनों को अपने यहां परफॉर्म करने का ऑफर दिया है। लेकिन देश के ऐसे तमाम छोटे-बड़े क्लब और डिस्कोथेक हैं, जिन्होंने शीर्ष हीरोइनों लायक बजट न होने की मजबूरी में ‘बी’ या ‘सी’ ग्रेड हीरोइनों पर दांव लगाया है।
इस स्थिति में उन सभी हीरोइनों की लॉटरी निकलने की संभावना बढ़ गई है, जो फ़िल्मों में घटती डिमांड के बावजूद अपने लटकों- झटकों की बदौलत मोटी कमाई के मिले इस चांस को कैश करना चाहती हैं।
यह बात अलग है कि बीते कई वर्षों से दर्शकों के लिए साल की आखिरी रात की फेवरिट रही ‘जलेबीबाई’ (मल्लिका शेरावत) को इस बार कोई नहीं पूछ रहा है, पर संभव है कि दीपिका पादुकोण, असिन, चित्रांगदा सिंह, श्वेता तिवारी आदि की तरह अभी वे भी भाव बढ़ाने की गरज से अपने पत्ते खोलने से बच रही हों।