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PHOTOS: हमेशा के लिए चले गए दारा सिंह, बॉलीवुड ने यूं दी विदाई

dainikbhaskar.com | Jul 12, 2012, 22:20PM IST

रूस्तम-ए-हिंद के नाम से प्रख्यात पहलवान और छोटे तथा रूपहले पर्दे पर अपने अभिनय का जलवा बिखेरने के साथ-साथ राजनीति के मैदान में भी खेम ठोंकने वाले दारा सिंह गुरुवार तड़के चिर निद्रा में लीन हो गए। वह 84 वर्ष के थे। उनके निधन से देश भर में शोक की लहर दौड़ गई।

कोकिलाबेन धीरूभाई अम्बानी अस्पताल के सीओओ राम नारायण ने बताया, "दारा सिंह का गुरुवार सुबह 7.30 बजे निधन हो गया।"उन्हें बुधवार देर रात इसी अस्पताल से अपने जुहू स्थित निवास पर लाया गया था। यहां उनका बीते कई दिनों से इलाज चल रहा था।

प्रधानमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा, "मुझे दारा सिंह की मृत्यु की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ है, जो हमारे देश की कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत व आदर्श रहे हैं।"

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा, "उनका अभिनय करियर उनके द्वारा निभाई गई भूमिकाओं में विविधता के लिए यादगार रहा। एक मनोनीत सांसद के रूप में उनकी भूमिका को सभी याद करते हैं।"

अनुभवी अभिनेता अनुपम खेर ने कहा कि वह एक विन्रम व्यक्ति से कहीं अधिक थे। जबकि मनोज बाजपेयी ने बीते जमाने के इस अभिनेता को शारीरिक शक्ति का प्रतीक बताया।

रुस्तम-ए-हिंद का खिताब जीतने वाले दारा बहुत सी फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में भी नजर आए थे।

दारा सिंह 1960 और 1970 के दशक में 'वतन से दूर', 'दादा', 'रुस्तम-ए-बगदाद', 'शेर दिल', 'सिकंदर-ए-आजम', 'राका', 'मेरा नाम जोकर' और 'धरम करम' जैसी फिल्मों में नजर आए। वह वर्ष 2007 में आई फिल्म 'जब वी मेट' में आखिरी बार नजर आए थे।

उनके परिवार में पत्नी और छह बच्चे-तीन बेटे तथा तीन बेटियां हैं।

कुश्ती खिलाड़ी रहे दारा के निधन से खेल जगत में भी शोक की लहर दौड़ गई। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने उनके निधन पर गहरा शोक जताते हुए कहा है कि उनकी मौत से भारतीय कुश्ती ने अपना मार्गदर्शक खो दिया है।

आईओए के कार्यकारी अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा ने अपने शोक संदेश में कहा कि दारा सिह चाहे अखाड़े के अंदर रहे हों या बाहर उन्होंने अपनी मेहनत और ग्लैमर से भारतीय कुश्ती को एक नए मुकाम पर पहुंचाया है।

मल्होत्रा ने अपने संदेश में कहा, "1950 और 1960 के सालों में दारा सिह का नाम भारतीयता का पर्याय बन गया था। उन्होंने भारतीय कुश्ती को एक ग्रामीण खेल की पहचान से उठा कर एक नई दशा और दिशा दी।"

उनका कहना है कि दारा सिह ने कुश्ती को लोकप्रिय बनाया और युवा वर्ग इसकी ओर आकर्षित हुआ।

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