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दिल में चुभते दर्द ने बनाया 'लीजेंड' एआर रहमान

dainikbhaskar.com | Aug 18, 2012, 00:34AM IST
बात 1991 की है जब महान डायरेक्टर मणि रत्नम अपनी नई फिल्म के लिए म्यूजिक कंपोजर की खोज में थे। मणि की दस फिल्मों में म्यूजिक देने वाले इलइयाराजा से उनके संबंध बिगड़ चुके थे। एक दिन एक अवार्ड फंक्शन में उनकी नजर उस नौजवान पर गई जिसे 'लियो कॉफी' एड के लिए बेस्ट एड जिंगल का अवार्ड दिया गया था। मणि के कजिन शारदा त्रिलोक ने उस युवा से उनकी मुलाकात करवाई। शारदा ने उनकी इतनी तारीफ की कि मणि उनके काम को परखने को बेचैन हो गए। उस कंपोजर ने खुशी-खुशी कुछ नई धुनें तैयार कीं और मणि को इन्वाइट किया। मणि पूरे छह महीने बाद उसके स्टूडियो पहुंचे। वहां मणि को वही धुन सुनाई गई जो उस युवा कंपोजर ने दक्षिण भारत में चल रहे कावेरी नदी विवाद से आहत हो कर बनाई थी।





वे ट्यून्स मणि के दिल के तारों को छेड़ गईं। एक सेकंड गंवाए बिना उन्होंने उस कंपोजर को साइन कर लिया। फिल्म तो बन नहीं पाई पर मणि उस नौजवान के धुनों को दुनिया को सुनाने को बेकरार थे। उन्होंने वेटरन तमिल डायरेक्टर के. बालाचंदर की फिल्म के लिए कंपोजिंग का काम सौंपा। फिल्म थी 'रोजा'। देखते ही देखते वह ट्यून 'थमीजा थमीजा' सॉन्ग के रूप में पॉपुलर हो गई। अगर कहा जाए कि फिल्म के म्यूजिक ने हिंदी सिनेमा को एक नया लीजेंड दिया तो कुछ गलत न होगा। उस 25 साल के नौजवान का नाम था एआर रहमान। इसके बाद जो हुआ वह बस उनकी सक्सेस की कहानियां कहता है।






लिरिसिस्ट गुलजार के साथ उन्होंने हिंदी की कई फिल्मों में काम किया है। गुलजार कहते हैं, 'वे हिंदी सिनेमा में मील के पत्थर हैं। उस अकेले इंसान ने फिल्मों में म्यूजिक की शक्ल ही बदल कर रख दी। उन्होंने मुखड़ा-अंतरा-मुखड़ा का ट्रेंड तोड़ दिया। वे दो अलग-अलग गानों से मिलती-जुलती धुन निकाल नया सॉन्ग बना सकते हैं, तब भी सुनने वाले को यह ट्यून बिल्कुल नई लगेगी। जरूरी नहीं कि उनके गानों का कोई फिक्स्ड फॉरमेट हो, यह किसी दोहे की तरह भी हो सकता है और फिर भी सबसे प्रभावशाली।'








रहमान की एक खास बात यह है कि वे ट्रेंड सिंगर्स की जगह अनट्रेंड व्यॉइसेज को इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है, 'अगर गाने में थोड़ी गड़बड़ी हो तो इसमें ह्यूमन टच आ जाता है।' उनके करीबी दोस्त रंजीत बैरट कहते हैं, 'हिंदी म्यूजिक इंडस्ट्री में कंपोजर्स उस वक्त घबरा जाते हैं अगर कुमार सानू या उदित नारायण जैसे सिंगर टाइम पर न आ पाएं। ऐसी सूरत में रहमान स्टूडियो में नजर घुमाते हैं और नए अनट्रेंड व्यॉइस के साथ एक्सपेरिमेंट करते हैं। वह जादूगर हैं क्योंकि वे सोते-जागते, खाते-पीते बस म्यूजिक में रमे रहते हैं।'









रहमान के चहेते डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा कहते हैं, 'रहमान के म्यूजिक के अनुसार सॉन्ग्स पिक्चराइज करना एक चैलेंज है।' उनके कॉम्पटीटर रहे नदीम-श्रवण की जोड़ी मानती है, 'रहमान की सबसे बड़ी खासियत है कि तगड़े साउथ इंडियन इन्फ्लूयंस के बावजूद वे नेशनल साउंड बना जाते हैं जो आम श्रोताओं को अपील करती है।'









इंटरनेशनली अक्लेम्ड तबलावादक उस्ताद जाकिर हुसैन उन दिनों को याद करते हैं जब रहमान ने वायलनिस्ट वैद्यनाथन और ड्रमर सिवमणी के साथ 'कलर्स' एलबम के लिए कीबोर्ड प्ले किया था। वे कहते हैं, 'तब वे मुश्किल से 19 साल के रहे होंगे और उन्होंने वेस्टर्न क्लासिकल से ले कर जैज, रॉक और कारनेटिक म्यूजिक में भी मास्टरी कर ली थी।'









लता मंगेशकर उनके साथ काम करने के एक्सपीरियंस के बारे में बताती हैं, 'रहमान को रात में म्यूजिक रिकॉर्ड करने की आदत है, पर मेरे साथ वे हमेशा सुबह ही रिकॉर्ड करते हैं जब मेरी आवाज फ्रेश रहती है। मुझे रात में रिकॉर्ड करना पसंद नहीं। जब कोई आर्टिस्ट दूसरे आर्टिस्ट के लिए ऐसा करता है तो बहुत खुशी होती है और काम भी अच्छा होता है। वे रिकॉर्डिंग में ज्यादा समय नहीं लगाते। 'जिया जले' को बस 40 मिनट में रिकॉर्ड किया गया था।'








कंपोजर विशाल ददलानी उनके बारे में कहते हैं, 'रहमान म्यूजिक प्रोडक्शन की इन्साइक्लोपीडिया हैं।' वहीं, कॉरियोग्राफर चिन्नी प्रकाश थोड़ा झुंझलाते हुए कहते हैं, 'रहमान के गानों को कॉरियोग्राफ करना बहुत मुश्किल है। वे 4-8-12-16 बीट्स के रिद्म को फॉलो नहीं करते। वे अनप्रेडिक्टेबल हैं। कभी-कभी वे 2 के बाद 4 न देकर 3/4 का बीट दे देते हैं। अब इसे कैसे कॉरियोग्राफ किया जाए?'







एकॅडमी अवार्ड जीत रचा इतिहास





रहमान को 2009 में फिल्म 'स्ल्मडॉग मिलियनेयर' के लिए 'बेस्ट ओरिजिनल स्कोर' और 'बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग' के लिए ऑस्कर अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके पहले म्यूजिक के क्षेत्र में किसी भी भारतीय ने यह उपलब्धि हासिल नहीं की थी। पूरी दुनिया में नाम कमा चुके रहमान कहते हैं, 'अगर कोई फुल-फ्लेजेड म्यूजिक आर्टिस्ट बनना चाहता है तो केवल रागों और तकनीक की जानकारी होना काफी नहीं। उसे अक्लमंद होने के साथ-साथ लाइफ और फिलॉसफी में भी गहरी रुचि होनी चाहिए। उसके दिल के किसी कोने में एक चुभता हुआ दर्द भी होना चाहिए।'








इतनी सफलता के बावजूद रहमान बदले नहीं। वे जमीन से जुड़े, शर्मीले, और लो प्रोफाइल मेंटेन करने वाले डेडिकेटेड इंसान हैं। रहमान के पहले किसे साउथ इंडियन म्यूजिक में इंट्रेस्ट था? डिस्को में माइकल जैक्सन और डॉ. अल्बन के अलावा किसकी धुन पर लोग थिरकते थे? पर एक इंसान ने यह सब बदल दिया। शायद ही कोई हो जो कहे कि उसे रहमान का म्यूजिक पसंद नहीं।







सच में, एआर रहमान की सफलता में लोगों का बड़ा हाथ है। बिना किसी फि़ल्मी बैकग्राउंड के भी रहमान ने जो मुकाम बनाया है, वो लोगों के प्यार की वजह से ही है। रहमान पर भास्कर के बॉलीवुड अवॉर्ड्स की पंच लाइन बिलकुल फिट बैठती है 'आप हैं, तो स्टार हैं'।








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