अभिषेक बच्चन को उनके सह-कलाकार फिल्म स्टार नहीं मानते। वे उन्हें प्रैंकस्टार मानते हैं क्योंकि सेट पर वे हमेशा सभी को इन हरकतों से बहुत हंसाते हैं। खिलंदड़ मिजाज के जूनियर बच्चन यह उपाधि मिलने पर कहते हैं ‘अरे भई मैं तो बहुत सीधा-सादा इंसान हूं। मैं कभी प्रैंक नही करता। मेरे सहज जोक्स ही लोगों की हालत खराब कर देते हैं।’
अभिषेक का मानना है कि फिल्ममेकिंग एक सीरियस काम है और बिना मजाक के ये बहुत बोरिंग हो जाता है। वे कहते हैं ‘काम तो मैं भी गंभीरता से ही करता हूं लेकिन शॉट के बाद भी हमेशा उसी में डूबे रहने से स्ट्रेस होने लगता है। थोड़ा हंसी-मजाक हो जाता है तो फ्रेशनेस आ जाती है। 6-7 महीनों तक जब आप उन्हीं सब चेहरों के बीच में रहते हैं तो वह भी परिवार की तरह ही हो जाता है। ऐसे में मजाक करने में कोई हिचक भी नहीं होती।’
क्रिसमस आने को है और बॉलीवुड में तो हर त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। क्रिसमस के बारे में पूछने पर वे कहते हैं कि ‘इस दिन से मेरी कई अच्छी यादें जुड़ी हुई हैं। वे कहते हैं ‘बचपन से ही हमारे घर में हर फेस्टिवल सेलिब्रेट होता रहा है। क्रिसमस पर तो तोहफे मिलते थे और ये किसे अच्छे नहीं लगते।’ फैमिली की बात आई तो घर की नई सदस्य बेबी बी का जिक्र लाजिमी था। अब तक उनकी तस्वीरें सामने न लाने के सवाल का जवाब उन्होंने कुछ अलग ढंग से दिया। उन्होंने अपने मोबाइल में खींचा हुआ फोटो हमें दिखा दिया। नन्ही परी की तरह दिखने वाली उनकी बेटी वाकई नजर लगने लायक है। उन्होंने अब तक अपनी लाडली को कोई नाम नहीं दिया है। इसी बात के साथ हमने उनसे कुछ और सवाल भी किए
आमिर खान ने तो अपने बेटे का नाम घोषित कर दिया जबकि वे बेबी के बाद जन्मे हैं।
अच्छी बात है कि उन्हें एक अच्छा नाम जल्द ही सूझ गया लेकिन यह कोई प्रतियोगिता तो है नहीं। हमने कुछ नाम सोचे तो हैं लेकिन अब भी विचार कर रहे हैं।
बेटी को देखकर आपका पहला रिएक्शन क्या था?
जैसे ही उसकी आवाज सुनी तो लगा ‘क्लाउड 9’ पर हूं। रिएक्ट करता इससे पहले ही डॉक्टर्स उसे कुछ टेस्ट या शायद क्लीनिंग के लिए ले गए। मैं तो बस चाह रहा था कि ऐश और बेबी स्वस्थ हों।
आपका निभाया कौन सा किरदार अभिषेक के सबसे करीब है?
फिल्म ‘कुछ न कहो’ का राज क्योंकि उसका जिंदगी जीने का तरीका मेरी तरह है। वह मस्तीखोर लेकिन जिमेदार है, मैं भी खुद को ऐसा ही पाता हूं।
सोशल नेटवर्किग साइट्स पर कई बार सितारों को बहुत तीखे कमेंट्स भी मिलते हैं। आपको नहीं लगता कि यह दखलंदाजी है?
ऐसी साइट्स पर अकाउंट हम ाुद बनाते हैं। ऑपरेट भी हम ही करते हैं, कंटेट भी हम ही डालते हैं लेकिन प्रतिक्रियाओं पर आपिा लेते हैं। मेरे हिसाब से यह ठीक नहीं है। लोग पैसे देकर पिलसिटी करते हैं। यह साइट्स नि:शुल्क लाइमलाइट में लाती है, इसमें तो कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
कुछ दिनों पहले कपिल सिबल ने इंटरनेट कंटेंट सेंसर करने की पहल की थी। इस बारे में कुछ कहें।
इस सब के अगले दिन ही मैं ट्विटर पर था और मैंने देखा कि बहुत बवाल मचा हुआ है। मुझे नहीं लगता कि इंटरनेट सेंसर उतना प्रभावी होगा।