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आमिर ने उठाया लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा

Dainikbhaskar.com | Jul 29, 2012, 11:22AM IST

इस बार आमिर खान ने सत्यमेव जयते शो में कहा कि अब तक उन्होंने इस कार्यक्रम में जनहित के मुद्दे उठाए हैं और किसी की संवेदनाओं को आहत नहीं किया है। 'मैंने जो मुद्दे उठाए हैं, वे इस देश की जनता के मुद्दे हैं और हमें ही इनका हल ढूंढना है।'
आमिर खान ने देश के भविष्य बच्चों से मिलवाया और कहा कि इनके कंधों पर ही समाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेवारी है। उन्होंने संविधान में निहित आदर्शों के बारे में बताया और कहा कि इन्हें हासिल करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। लोगों की बराबरी, आर्थिक आजादी, सामाजिक न्याय आदि ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें हम आज तक हासिल नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि आज का शो आजादी, बराबरी और न्याय के नाम है।
उन्होंने कुछ ऐसे उदाहरण पेश किए जिनमें साम्र्प्रदायिक दंगों के कारण लोगों का घर-बार उजड़ गया था और न जाने कितने बच्चे यतीम हो गए थे। उन्होंने दंगों के शिकार कई लोगों से बातें कीं और उनके अनुभवों को दर्शकों के साथ साझा किया। शो में आए इन लोगों ने बताया कि नफरत की आग के बीच भी इंसान की भावनाएं मरी नहीं और कई लोगों ने प्यार और भाईचारे की अद्भुत मिसाल पेश की।
 
साम्प्रदायिक दंगों के सवाल पर उन्होंने कश्मीर के  गुलाम कादिर साहब और अब्दुल हबीब जी से बात की। उन्होंने कहा कि ये दंगे भारत की संस्कृति पर हमला हैं। उन्होंने बताया कि कश्मीर में आज भी भाईचारा मौजूद है। 'एक बार दंगे की शिकार एक महिला आशा जी का परिवार घर छोड़ कर भाग रहा था, पर हमने  उन्हें ऐसा करने से रोका। 1947 में हमारे पूर्वजों ने भी दंगे के शिकार लोगों को जाने नहीं दिया था।'
 
आमिर खान ने  बिहार के गांव से आए संजीव चौधरी से बात की जिनका दिल्ली में मॉडलिंग में अच्छा कॅरियर चल रहा था, पर उन्हें छुआ-छूत  और दलित महिलाओं के उत्पीड़न की समस्या ने इस कदर झकझोरा कि वे ग्लैमर की चकाचौंध भरी दुनिया छोड़  अपने गांव लौट आए और कुप्रथाओं के खिलाफ जंग छेड़  दी। उन्होंने ऊंची जाति के लोगों द्वारा शोषण की शिकार दलित महिलाओं को संगठित करना शुरू किया और उन्हें  अन्याय के खिलाफ  आवाज उठाने के  लिए  प्रेरित किया। आज संजीव चौधरी 167 एकड़ जमीन पर खेती करवाते हैं जिससे दलितों की आर्थिक हालत काफी  अच्छी हो गई  है। दलितों को   गंगा में स्नान करने नहीं दिया जाता था। उन्होंने इसके खिलाफ भी संघर्ष किया और आज दलित गंगा-स्नान करते हैं। इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए संजीव चौधरी हर साल  कलश यात्रा का आयोजन करते हैं।
 
आमिर ने महानगरों में जारी देह-व्यापार के मुद्दे को भी उठाया। देह-व्यापार के दलदल में फंसी महिलाओं के उद्धार के लिए काम करने वाली कुछ औरतों से उन्होंने  बातचीत  की। उन औरतों ने बताया कि लाखों महिलाएं देह-व्यापारियों के चंगुल में पड़ी हुई हैं और उनका बेतरह शोषण हो रहा है। यहां तक कि 6-7 साल की लड़कियों को भी इस नरक में धकेल दिया गया  है। उन महिलाओं ने बताया कि उनकी संस्था ऐसी लड़कियों को इस नरक से निकालने के लिए लगातार काम कर रही है। खास बात यह है कि 10-20 हजार रुपये में  लड़कियों का सौदा कर दिया जाता है।
 
आमिर ने विक्लांग बच्चों  की समस्या को भी उठाया। इस मुद्दे पर उन्होंने नसीमा खातून से बातचीत की जो ऐसे बच्चों के लिए एक स्कूल चलाती हैं। नसीमा ने बताया कि उनके स्कूल में इन बच्चों का पूरा ध्यान रखा जाता है और उन्हें ऐसी ट्रेनिंग दी  जाती है, ताकि  वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
 
इसके अलावा शो में आमिर ने और भी कई समस्याएं उठाईं और इन पर काम करने वाले लोगों से बातचीत की। लोकतंत्र को मजबूत करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इस शो से यही संदेश उभर कर सामने आया कि दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतंत्र में ऐसी कई सामाजिक समस्याएं हैं जिनका निदान करना  बहुत जरूरी है। तभी स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का लक्ष्य हासिल किया जा सकता  है। इस काम को पूरा करने की चुनौती नई पीढ़ी के सामने है। आमिर ने यह उम्मीद जताई कि बच्चे ही इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करेंगे और देश में  लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली में अहम भूमिका निभाएंगे। 
 
पेश है इस एपिसोड की कुछ झलकियां-

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