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'तलाश' ने आमिर को वो सिखा दिया जो उन्होंने 25 सालों में नहीं सीखा'

Sunil Kukreti | Nov 26, 2012, 16:13PM IST

रीमा कागती के निर्देशन में आमिर ख़ान अभिनीत एवं  निर्मित ‘तलाश’ एक सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म है। आगामी  30 नवंबर को प्रदर्शित हो रही इस फ़िल्म में आमिर ख़ान केअपोजिट रानी मुखर्जी एवं करीना कपूर की मुख्य भूमिकाएं हैं।
आमिर फ़िल्म में एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं। इस फ़िल्म और दूसरे कई मुद्दों पर आमिर से विशेष बातचीत:



आपने किन कारणों से इस स्क्रिप्ट को चुना?
ख़ास बात तो यही थी कि जब मैंने कहानी सुनी, सभी किरदार मुझे बड़े इंटरेस्टिंग लगे। राइटर्स जोया और रीमा ने कहानी में जो रहस्य पैदा किया हुआ था, वह मुझे काफ़ी देर तक समझ में नहीं आया था। सस्पेंस फ़िल्में तो बहुत आई हैं, पर यह सस्पेंस के अलावा एक जज्बाती कहानी भी है। हम सबको अपनों के खोने का डर हमेशा बना रहता है। यह फ़िल्म हमारे उस डर को बयान करती है।

क्या आप ख़ुद वैसे डर के अनुभवों से गुज़रे हैं?
जी गुज़रा भी हूं और अक्सर गुज़रता रहता हूं। जब कभी फ्लाइट में जाने के बाद नीचे उतरता हूं और किरण का फ़ोन आता है कि फ़ौरन फ़ोन करो तो मैं एक पल के लिए घबरा ही जाता हूं। या शूटिंग कर रहा होता हूं और घर वालों को पता है कि मैं तब किसी तरह का डिस्टरबेंस बर्दाश्त नहीं करता हूं, इसके बावजूद कोई कॉल या मैसेज आ जाता है तो मैं कुछ अनहोनी की शंका में डर जाता हूं। मेरे ख़याल से हम सभी के साथ ऐसा होता है।

आप स्क्रिप्ट चुनने में काफ़ी समय लगाते हैं!
मेरे ख़याल में मैं ही स्क्रिप्ट चुनने में समय नहीं लगाता, मेरे साथ वे लोग भी उतना ही व़क्त लगाते हैं, जिनके साथ मैं काम करता हूं। इसकी वजह यही है कि हम सब बड़ा जी लगा कर काम करने वाले लोग हैं। चाहे वह राजू हिरानी हों या आशुतोष गोवारीकर या फ़रहान अख्तर, सब बड़ा दिल लगाकर काम करने वाले हैं। वे लोग भी उतना ही वक़्त लेते हैं, इसलिए फ़िल्म बनने में टाइम लग जाता है। ऐसा नहीं है कि हम आलसी हैं और घर पर बैठे रहते हैं।

सुना है कि ‘तलाश’ की निर्देशिका रीमा कागती से आपकी अनबन हो गई थी और ‘कहानी’ से आपकी फ़िल्म की कहानी का कुछ मिलान देखा गया तो रीमा को ‘तलाश’ की कहानी बदलनी पड़ी!
पहली बात तो मैं यह कहूंगा कि मैं रीमा से बहुत ख़ुश हूं। दूसरी बात, मैंने ‘कहानी’ आज तक देखी ही नहीं है। तब मैं इस बात का कैसे जवाब दे सकता हूं कि किस तरह दोनों फ़िल्में मेल खाती हैं!


मैं क्यों किसी ऐसी कहानी में बदलाव करना चाहूंगा, जिसे मैं पसंद कर चुका हूं! रीमा से मैं इस बात को लेकर बहुत ख़ुश हूं कि वे अपनी फ़िल्म को लेकर एकदम फ़ोकस्ड हैं। वे जोया के साथ फ़िल्म की लेखिका भी हैं। मुझे अगले साल फ़िल्म इडंस्ट्री में 25 साल हो जाएंगे। मैंने अपने इतने लंबे करियर के बाद ऐसी कई नई बातें रीमा के साथ  सीखीं, जिनके बारे में कभी सोचा तक नहीं था।

यह फ़िल्म पहले कुछ अन्य एक्टर्स के पास गई थी!
यह सही बात है, लेकिन मुझे इससे कोई एतराज़ नहीं है। कोई फ़िल्म किसी एक्टर को पसंद नहीं आती है और दूसरा उसे कर सकता है तो वह करेगा ही। ‘लगान’ भी कई एक्टर्स के पास गई थी। मुझे दूसरे लोग समझाते रहते हैं कि इस फ़िल्म को मत करो, वर्ना ऐसा हो जाएगा।


लेकिन मैं उन फ़िल्मों को ज़रूर करता हूं, जो मेरे दिल को अच्छी लगती हैं। तो ऐसा मेरे साथ अक्सर होता रहता है।ऐसा ही फ़िल्म में आपके घोस्ट डायरेक्शन की बातों को लेकर होता रहता है!मैं आप लोगों को पिछले 20 सालों से नहीं समझा पाया हूं कि मैं भला क्यों किसी के काम में मदद करूंगा, जिसका  क्रेडिट और फ़ीस दूसरा ले रहा हो!


आप इस बात के लॉजिक को तो समझें! इसी बात का दूसरा पहलू देखें। आप दूसरे एक्टर्स की फ़िल्में देखें, जिन्हें वे अलग-अलग डायरेक्टर्स के साथ करते हैं, पर एक जैसी दिखाई देती हैं। दूसरी तरफ़ मैं जितनी फ़िल्में करता हूं, वे सब एक-दूसरी से अलग होती हैं। अगर मैं उन फ़िल्मों में अपना डायरेक्शन झाड़ता रहता तो क्या वे एक जैसी नहीं दिखाई देती!

सस्पेंस फ़िल्मों में रिपीट वैल्यू नहीं होती!
हां, यह सही बात है। लेकिन आपने यह भी देखा होगा कि जब एक  बार आप सस्पेंस जान लेते हैं, दोबारा इसलिए देखना चाहते हैं कि इन लोगों ने ग़लती कहां पर कर रखी है। ‘ज्वेलथीफ़’ और हाल की रिलीज ‘कहानी’ इस बात का उदाहरण है।


सफल सस्पेंस फ़िल्मों की यही ख़ासियत होती है। ख़ैर, सस्पेंस मेंटेन करने के लिए हम यह करने वाले हैं कि अपने प्रचार के तरीक़े के तौर पर 8-9 ऐसे मैसेज लोगों के बीच छोड़ देंगे, जिससे लोग समझ नहीं पाएंगे कि असली रहस्य या विलेन कौन है?

सुना है कि ‘तलाश’ की कहानी एक अमेरिकी नाटक से ली गई है?
मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। मुझे तो यह जानकारी है कि यह कहानी ज़ोया के एक व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है।

आप अपनी हर फ़िल्म में गेटअप और किरदार को लेकर नया प्रयोग करते नजर आते हैं!
मैं ऐसा सोच-विचार कर तो नहीं करता, इत्तेफ़ाक़न हो जाता है। वैसे एक क्रिएटिव पर्सन होने के नाते यह मेरा फ़र्ज़ भी बनता है और मुझे अच्छा भी लगता है कि मैं अलग-अलग ढंग से हर फ़िल्म में अलग-अलग किरदार करूं।


मैं यह नहीं कहूंगा कि सबको ऐसा करना चाहिए। दूसरी तरफ़ ऐसे एक्टर भी हैं, जिन्होंने अपनी पूरी लाइफ़ एक जैसे किरदार निभाए हैं और बड़ी खूबी से निभाए हैं। बड़े हिट रहे हैं और उन्हें बड़ा पसंद भी किया गया है।

रानी और क़रीना के अभिनय के बारे में बताइए?
रानी फ़िल्म में मेरी पत्नी बनी हैं। क़रीना के किरदार के बारे में नहीं बताऊंगा। एक एक्ट्रेस के तौर पर दोनों के बारे में यही कहूंगा कि वे बड़ी फ़ोकस्डहैं। अपने काम के प्रति बड़ी गंभीर हैं।

‘तलाश’ की रिलीज के बाद आपकी व्यस्तता क्या रहेगी?
फिर ‘धूम 3’ की रिलीज और प्रोमोशन की तैयारी होगी। अगले वर्ष राजू हिरानी की ‘पीके’ करूंगा और ‘पीके’ के कंपलीट होने के बाद ‘सत्यमेव जयते’ के अगले सीजन पर काम शुरू कर दूंगा।
 

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